एक्टर राजपाल यादव के चेक-बाउंस केस में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद उनके वकील एडवोकेट भास्कर उपाध्याय ने इसे “बड़ी राहत” बताया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट अब मामले को मेरिट के आधार पर सुनने के लिए तैयार हो गया है।

बाकी पेमेंट करने की बात

सुनवाई के बाद मीडिया से बात करते हुए भास्कर उपाध्याय ने कहा कि कोर्ट ने जो कुछ करने के लिए कहा था, उसका बड़ा हिस्सा पहले ही पूरा किया जा चुका है। कुछ पेमेंट अभी बाकी हैं और उन्हें पूरा करने के बाद केस की मेरिट के आधार पर सुनवाई होगी।

वकील ने कहा कि राजपाल यादव ने कोर्ट को बताया कि उनके साथ क्या हुआ और कैसे 5 करोड़ रुपये की रकम ने उनके अपने 17 करोड़ रुपये खा लिए, जिससे वे पूरी तरह खत्म हो गए। उन्होंने कहा कि कोर्ट का केस की मेरिट के आधार पर सुनवाई के लिए तैयार होना उनके लिए बड़ी राहत है।

कोर्ट में पेश हुए राजपाल यादव

चेक-बाउंस केस में बकाया रकम जमा न कर पाने पर कोर्ट की कड़ी चेतावनी के बाद राजपाल यादव खुद सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश हुए। यादव ने कोर्ट को बताया कि वह 2 करोड़ रुपये देंगे और 1.15 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट भी दिखाया। उनकी प्रॉपर्टी का एक खरीदार, जिसे बाकी 85 लाख रुपये देने हैं, वह भी कोर्ट में मौजूद था।

13 अक्टूबर तक 2 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वी. मोहना की बेंच ने यादव को 13 अक्टूबर तक शिकायत करने वाले को बकाया रकम के तौर पर 2 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने कहा कि पेमेंट होने के बाद वह दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ यादव की याचिका पर विचार करेगा, जिसमें उन्हें दोषी ठहराया गया था और तीन महीने की सजा दी गई थी।

RTGS की इजाजत नहीं मिलने की बात

यादव के वकील ने कोर्ट को बताया कि वह पेमेंट करने के लिए कोर्ट की रजिस्ट्री गए थे, लेकिन RTGS की इजाजत नहीं थी। इसलिए वह 1.15 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट लेकर आए। बाकी 85 लाख रुपये को लेकर वकील ने कहा कि यादव की प्रॉपर्टी का खरीदार मौजूद है और वह पेमेंट कर देगा।

राजपाल यादव ने न्यायपालिका के सम्मान की बात कही

मीडिया से बात करते हुए राजपाल यादव ने कहा कि फिल्मों के लिए लोन नहीं लिया जाता। उन्होंने कहा कि घर बनाने या जमीन खरीदने के लिए लोन लिया जाता है, फिल्में बनाने के लिए नहीं। उनके मुताबिक यह या तो पैकेज डील होती है या इन्वेस्टमेंट।

राजपाल यादव ने कहा कि वह अपने देश, सुप्रीम कोर्ट और न्यायपालिका का बहुत सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि जो भी फैसला आएगा, उसे सभी मानेंगे।

2010 में लिए करीब 5 करोड़ रुपये के लोन का मामला

यह मामला राजपाल यादव द्वारा 2010 में अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लिए गए लगभग 5 करोड़ रुपये के लोन से जुड़ा है। बाद में 1.05 करोड़ रुपये के सात रीपेमेंट चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद चेक-बाउंस का मामला चला। सालों के दौरान ब्याज और दूसरे चार्ज के साथ बकाया रकम बढ़ती गई।

5 अक्टूबर को कोर्ट ने लगाई थी फटकार

5 अक्टूबर को कोर्ट ने यादव को 2 करोड़ रुपये जमा करने के पहले के निर्देश का पालन न करने पर कड़ी फटकार लगाई थी। इससे पहले 15 सितंबर को कोर्ट ने उन्हें रकम जमा करने और एक पक्का रीपेमेंट प्लान जमा करने के लिए दो हफ्ते का आखिरी मौका दिया था।

कोर्ट ने यह भी साफ किया कि दिया गया एक्सटेंशन शिकायत करने वाले को पेमेंट पक्का करने के लिए है और यादव को उनके बर्ताव को लेकर चेतावनी दी।

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