गुवाहाटी : असम की राजधानी गुवाहाटी केवल कामाख्या मंदिर के लिए ही नहीं, बल्कि अनेक प्राचीन और आस्था से जुड़े धार्मिक स्थलों के लिए भी जानी जाती है। इन्हीं में से एक है पामोही स्थित भीमाशंकर धाम, जिसे स्थानीय धार्मिक परंपरा में भगवान शिव के पवित्र धाम के रूप में विशेष महत्व प्राप्त है।
दाकिनी पहाड़ी क्षेत्र में स्थित यह धाम श्रद्धा के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य का भी अनूठा संगम प्रस्तुत करता है। हरियाली से घिरी पहाड़ी, शांत वातावरण और शिव आराधना का यह केंद्र गुवाहाटी में धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं को विस्तार देता है।
प्राकृतिक जलधारा करती है शिवलिंग का अभिषेक
भीमाशंकर धाम की प्रमुख विशेषताओं में यहां शिवलिंग पर प्राकृतिक जलधारा से होने वाला जलाभिषेक बताया जाता है। श्रद्धालुओं के लिए यह दृश्य धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति के अद्भुत रूप का अनुभव भी कराता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार इस स्थान का संबंध भगवान शिव और राक्षस भीमासुर की कथा से है। मान्यता है कि भगवान शिव ने भक्तों की रक्षा के लिए भीमासुर का संहार किया और इसी कारण इस स्थान का नाम भीमाशंकर पड़ा।
गुवाहाटी का यह स्थल स्थानीय धार्मिक परंपरा में भीमेश्वर धाम/भीमाशंकर के रूप में प्रतिष्ठित है। असम सरकार के एक आधिकारिक दस्तावेज में “Bhimeswar Dham Dwadas Jyotirlinga, Pamohi, Gorchuk” को गुवाहाटी के धार्मिक स्थलों की सूची में शामिल किया गया है।
धार्मिक पर्यटन को मिल रहा सरकारी प्रोत्साहन
असम सरकार पर्यटन को राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम मानती है। राज्य का पर्यटन विभाग नीतियों और योजनाओं के माध्यम से पर्यटन स्थलों के विकास, बुनियादी ढांचे, मानव संसाधन, प्रचार-प्रसार और नए पर्यटन उत्पादों के विकास पर काम कर रहा है।
इसी दिशा में ‘असम दर्शन’ योजना महत्वपूर्ण पहल है। वर्ष 2019-20 में शुरू की गई इस योजना में धार्मिक स्थलों पर आवश्यक बुनियादी ढांचे में सुधार, प्राकृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व के स्थलों का विकास और पर्यटकों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी जैसे घटक शामिल हैं। इस तरह की पहलों का उद्देश्य केवल मंदिरों और पर्यटन स्थलों का सौंदर्यीकरण करना नहीं है, बल्कि वहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाना तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को इससे जोड़ना भी है।
मंदिर तक आने वाले पर्यटकों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ
किसी धार्मिक स्थल पर पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने का सीधा असर आसपास की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। परिवहन, टैक्सी, स्थानीय भोजन, चाय-नाश्ते की दुकानें, फूल-प्रसाद, धार्मिक सामग्री, हस्तशिल्प, छोटे होटल, होमस्टे और स्थानीय गाइड जैसी सेवाओं में मांग बढ़ती है।
यानी पर्यटन केवल मंदिर परिसर तक सीमित गतिविधि नहीं है। एक पर्यटक जब किसी धार्मिक स्थल पर पहुंचता है तो उसके साथ परिवहन से लेकर भोजन, खरीदारी और आवास तक पूरी स्थानीय पर्यटन अर्थव्यवस्था सक्रिय होती है। असम सरकार भी पर्यटन को रोजगार और आर्थिक विकास से जोड़कर देखती है। पर्यटन विभाग के अनुसार स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देना पर्यटन विकास की महत्वपूर्ण दिशा है।
रोजगार के नए अवसरों की संभावना
भीमाशंकर जैसे धार्मिक स्थलों का विकास स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा कर सकता है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर ड्राइवर, टूर गाइड, होटल और होमस्टे कर्मचारी, दुकानदार, भोजनालय संचालक, फोटोग्राफर और स्थानीय हस्तशिल्प विक्रेता जैसे अनेक व्यवसायों को लाभ मिल सकता है।
सरकार पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को भी प्रोत्साहित कर रही है। असम पर्यटन विकास निगम के अनुसार राज्य में कई पर्यटन परियोजनाएं निजी भागीदारी के साथ संचालित हैं तथा होटल, रिसॉर्ट, पर्यटन सुविधाओं और अन्य परियोजनाओं में निवेश की संभावनाएं विकसित की जा रही हैं। इससे धार्मिक पर्यटन स्थलों के आसपास स्थानीय उद्यमिता और रोजगार का एक व्यापक इकोसिस्टम विकसित होने की संभावना बनती है।
पर्यटन और स्थानीय संस्कृति का जुड़ाव
असम सरकार की पर्यटन नीति स्थानीय संस्कृति, हस्तशिल्प, खान-पान और समुदाय को पर्यटन से जोड़ने पर भी जोर देती है। इसका लाभ यह है कि पर्यटक केवल किसी मंदिर के दर्शन करके वापस नहीं लौटता, बल्कि स्थानीय संस्कृति और उत्पादों का अनुभव भी करता है।
गुवाहाटी जैसे शहर में यह मॉडल विशेष रूप से प्रभावी हो सकता है, क्योंकि शहर पहले से ही पूर्वोत्तर भारत के प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में विकसित हो रहा है। धार्मिक पर्यटन को प्रकृति, संस्कृति और स्थानीय अनुभवों के साथ जोड़कर पर्यटकों के ठहरने की अवधि और स्थानीय खर्च दोनों बढ़ाए जा सकते हैं।
आस्था से अर्थव्यवस्था तक
भीमाशंकर धाम की कहानी केवल धार्मिक आस्था की कहानी नहीं है। यह इस बात का उदाहरण भी है कि किस प्रकार धार्मिक विरासत, प्राकृतिक पर्यटन और सरकारी विकास योजनाएं मिलकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति दे सकती हैं। बेहतर सड़क और कनेक्टिविटी, स्वच्छता, पेयजल, पार्किंग, सूचना सुविधाएं, सुरक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित होने के साथ यदि स्थानीय समुदाय को पर्यटन गतिविधियों में अधिक भागीदारी मिले, तो इसका लाभ सीधे स्थानीय परिवारों तक पहुंच सकता है।
इस तरह गुवाहाटी का भीमाशंकर धाम आने वाले समय में आस्था के साथ पर्यटन, स्थानीय रोजगार और स्वरोजगार का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। यही धार्मिक पर्यटन की वह व्यापक तस्वीर है जिसमें एक मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं रहता, बल्कि आसपास के क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास का माध्यम भी बन जाता है।



