कानपुर नगर निगम में विकास कार्यों के नाम पर धांधली का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां 15वें वित्त आयोग के करीब 594 करोड़ रुपये के बजट के बंदरबांट का आरोप लगा है। मुख्यमंत्री की सख्त हिदायत के बाद अब पूरा बजट जांच के दायरे में आ गया है। जांच में बजट आवंटन का भारी भेदभाव सामने आया है; सभी 6 ज़ोन में से सबसे ज़्यादा बजट जोन-2 को मिला, जिसमें वार्ड-62 के पार्षद भवानी शंकर राय के लिए सबसे अधिक 14.41 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए। वहीं, वार्ड 94, 38, 4 और 10 जैसे चार वार्डों को अब तक एक भी रुपया आवंटित नहीं किया गया।
बता दें, घोटाले की गाज अब आरोपियों पर गिरनी शुरू हो गई है। टेंडर घोटाले के मुख्य आरोपी गोविंद शर्मा के फजलगंज स्थित मकान को कानपुर विकास प्राधिकरण ने सील कर दिया है। बताया जा रहा है कि यह मकान केडीए में नौकरी के दौरान गोविंद को आवंटित हुआ था। इसके अलावा, नगर आयुक्त ने कार्रवाई करते हुए इंजीनियरिंग विभाग के हेड क्लर्क भूपेंद्र सिंह सचदेव को निलंबित कर दिया है।
वहीं, मामले की गहराई से छानबीन के लिए एसआईटी की टीम भी सक्रिय हो गई है और दो अभियंताओं—आरके सिंह तथा अवर अभियंता कमलेश पटेल को पूछताछ के लिए अपने साथ मुख्यालय ले गई है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि पुलिस और प्रशासन छोटी मछलियों पर कार्रवाई कर रहा है जबकि घोटाले में शामिल बड़े राजनीतिक चेहरे और अफसर अभी भी कार्रवाई से बचे हुए हैं।



