वाशिंगटन/बीजिंग: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन और ताइवान के बीच चल रहे भारी तनाव को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा बयान दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस समय अमेरिका को किसी भी नए युद्ध की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है, विशेषकर ऐसे युद्ध की जो अमेरिका से 9,500 मील दूर हो। वैश्विक राजनीति और कूटनीति के लिहाज से ट्रंप के इस बयान को बेहद गंभीर माना जा रहा है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने यह बातें ‘एयर फोर्स वन’ विमान में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहीं। इस दौरान उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई अपनी लंबी और अहम चर्चाओं का भी खुलासा किया।

शी जिनपिंग ताइवान की आजादी के सख्त खिलाफ: ट्रंप

राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ ताइवान और ईरान के मुद्दे पर बहुत गहराई से बातचीत की है। ट्रंप ने शी जिनपिंग की तारीफ करते हुए उन्हें एक ‘शानदार व्यक्ति’ बताया। उन्होंने कहा:

“शी जिनपिंग ताइवान की आजादी की लड़ाई के सख्त खिलाफ हैं, क्योंकि उनका मानना है कि ऐसा होने पर एक बहुत बड़ा और खतरनाक सैन्य टकराव हो सकता है। जब ताइवान का मुद्दा उठा, तो मैंने सिर्फ शी जिनपिंग की बात सुनी और उस पर अपनी तरफ से कोई टिप्पणी नहीं की।”

1982 का समझौता अब पुरानी बात: हथियारों की बिक्री पर बोले ट्रंप

पत्रकारों ने जब ट्रंप से पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन द्वारा 1982 में दिए गए उस आश्वासन के बारे में पूछा, जिसमें कहा गया था कि ‘अमेरिका ताइवान को हथियार बेचने पर चीन से सलाह नहीं लेगा’, तो ट्रंप ने इसका बेबाकी से जवाब दिया।

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि 1982 की बातें अब बहुत पुरानी हो चुकी हैं। उन्होंने साफ किया कि बातचीत के दौरान खुद चीनी राष्ट्रपति ने यह मुद्दा उठाया था और वे इस पुराने समझौते का हवाला देकर बातचीत से पीछे नहीं हट सकते थे। दोनों नेताओं ने ताइवान को हथियारों की बिक्री के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की है। ट्रंप ने कहा कि इस विषय पर वह जल्द ही कोई बड़ा फैसला लेंगे, लेकिन फिलहाल 9,500 मील दूर एक युद्ध अमेरिका की आखिरी जरूरत है।

क्या ताइवान की रक्षा के लिए सेना भेजेगा अमेरिका?

जब राष्ट्रपति ट्रंप से सीधा सवाल पूछा गया कि अगर ताइवान पर चीन हमला करता है या कोई संकट आता है, तो क्या अमेरिका अपनी सेना वहां भेजेगा? इस पर ट्रंप ने कोई भी साफ जवाब देने से इनकार कर दिया।

ट्रंप ने सस्पेंस बरकरार रखते हुए कहा कि इस बात का जवाब सिर्फ उन्हें पता है। उन्होंने एक दिलचस्प वाकया साझा करते हुए बताया कि यही सवाल खुद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी उनसे पूछा था कि क्या अमेरिका ताइवान की रक्षा करेगा? इसके जवाब में ट्रंप ने जिनपिंग से भी यही कहा था कि वह इन सामरिक मामलों पर खुलकर बात नहीं करते हैं।

होर्मुज जलमार्ग और ईरान को लेकर ट्रंप का बड़ा दावा

ताइवान के अलावा दोनों वैश्विक नेताओं के बीच ईरान और होर्मुज जलमार्ग (Strait of Hormuz) को लेकर भी रणनीतिक चर्चा हुई। ट्रंप ने दावा किया कि शी जिनपिंग खुद ईरान पर दबाव डालेंगे ताकि होर्मुज का समुद्री रास्ता खुला रहे। इसका मुख्य कारण यह है कि चीन को अपना लगभग 40 प्रतिशत कच्चा तेल इसी जलमार्ग से मिलता है, जबकि अमेरिका को वहां से तेल की कोई जरूरत नहीं है।

अमेरिकी किसानों को होगा फायदा, चीनी दूतावास ने जताई सहमति

व्यापार के मुद्दे पर ट्रंप ने बताया कि चीन के साथ उनकी बहुत सकारात्मक सहमति बनी है, जिससे अमेरिकी किसानों को बहुत बड़ा फायदा मिलेगा। वहीं दूसरी ओर, चीनी दूतावास ने भी इस मुलाकात पर एक आधिकारिक बयान जारी किया है। चीनी दूतावास के अनुसार, दोनों देश रणनीतिक स्थिरता और एक रचनात्मक संबंध बनाने पर पूरी तरह सहमत हुए हैं।

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