नई दिल्ली में आयोजित एक गरिमामयी समारोह के दौरान देश के 12वें ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ के अवसर पर उत्तर प्रदेश की पारंपरिक कला को एक नई पहचान मिली है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के प्रख्यात बुनकर शाह मुहम्मद अंसारी को प्रतिष्ठित ‘संत कबीर हथकरघा पुरस्कार’ से सम्मानित किया। इस उपलब्धि से पूरे प्रदेश के शिल्पकारों और बुनकर समुदाय में हर्षोल्लास का माहौल है।
बनारसी बुनाई कला को दिया नया जीवन
शाह मुहम्मद अंसारी ने गौरवशाली और प्राचीन बनारसी बुनाई कला के संरक्षण और संवर्धन में अहम भूमिका निभाई है। लुप्त हो रही इस कला को बचाने के साथ-साथ उन्होंने नई पीढ़ी के युवाओं और बुनकरों को इस हुनर से प्रशिक्षित करने का सराहनीय कार्य किया है। उनके इन निरंतर प्रयासों से उत्तर प्रदेश की समृद्ध हथकरघा विरासत को एक नई और वैश्विक पहचान मिली है। उनकी यह सफलता प्रदेश के समस्त पारंपरिक कारीगरों के लिए एक बड़ा प्रेरणास्रोत बन गई है।
हथकरघा उद्योग को मिला बढ़ावा
सरकार और देश के सर्वोच्च पद से बुनकरों की कला को इस तरह सम्मानित किए जाने से देश के हथकरघा उद्योग को एक नया संबल मिला है। कार्यक्रम के दौरान देश भर से आए अन्य हस्तशिल्पियों और बुनकरों के कार्यों की भी सराहना की गई। शाह मुहम्मद अंसारी को मिले इस राष्ट्रीय पुरस्कार ने यह साबित कर दिया है कि देश की जमीनी कला और संस्कृति को सहेजने वाले कलाकार आज भी हमारी सांस्कृतिक धरोवर की असली ताकत हैं।



