नई दिल्ली। अमेरिका, इजराइल और सात अरब देशों के शीर्ष सैन्य कमांडरों ने पिछले हफ्ते जर्मनी में एक निजी बैठक की। इस बैठक में ईरान के साथ चल रहे युद्ध और मध्य पूर्व में बढ़ते सुरक्षा संकट पर चर्चा हुई। यह जानकारी एक्सियोस की रिपोर्ट में दो इजराइली अधिकारियों के हवाले से दी गई है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर द्वारा आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक की किसी भी भाग लेने वाली सरकार ने आधिकारिक घोषणा नहीं की थी। यह अमेरिका और इजराइल के ईरान के साथ युद्ध में शामिल होने के छह महीने से अधिक समय बाद अपनी तरह का पहला शिखर सम्मेलन था।

बैठक में इजराइल के साथ-साथ सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और मिस्र के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने भाग लिया। यह मुलाकात इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इनमें से कई अरब देशों के इजराइल के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बाद में पुष्टि की कि उसने जर्मनी में आयोजित एक निर्धारित सम्मेलन में आठ देशों के वरिष्ठ सैन्य नेताओं की मेजबानी की, जिसका उद्देश्य मध्य पूर्व में क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को बढ़ाना था।

रिपोर्ट के मुताबिक, एडमिरल ब्रैड कूपर ने कमांडरों को आश्वासन दिया कि अमेरिकी सेना के ईरानी हमलों के बावजूद क्षेत्र से अपनी सेनाएं हटाने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात बढ़ाने की वाशिंगटन की रणनीति पर भी जानकारी दी। वहीं, इजराइल डिफेंस फोर्सेज के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल एयल जमीर ने कई मोर्चों पर चल रहे इजराइली सैन्य अभियानों पर विस्तृत अपडेट दिया।

2020 के अब्राहम समझौतों के बाद इजराइल और विभिन्न अरब देशों के बीच सैन्य सहयोग लगातार बढ़ा है, खासकर वायु और मिसाइल रक्षा के क्षेत्र में। युद्ध के दौरान इजराइल ने संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका के साथ रक्षात्मक और आक्रामक अभियानों में घनिष्ठ सहयोग किया है। इजराइली अधिकारियों के मुताबिक, इजराइल ने यूएई में अपनी आयरन डोम प्रणाली तैनात की है और महत्वपूर्ण खुफिया, निगरानी और टोही सहायता भी प्रदान की है।

यह बैठक ऐसे समय हुई है जब सऊदी अरब के खिलाफ हूती हमले तेज हो गए हैं और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास उनका क्षेत्रीय नियंत्रण बढ़ रहा है। एक्सियोस के सूत्र के मुताबिक, इजराइल और सऊदी अरब अमेरिकी सेंट्रल कमांड की सक्रिय भागीदारी के साथ हूती के खिलाफ सऊदी सैन्य अभियानों के लिए संभावित इजराइली सहायता पर भी बातचीत कर रहे हैं, जिसमें खुफिया और निगरानी सहायता शामिल है।

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