उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक शहर कानपुर को कागजों में भले ही ‘स्मार्ट सिटी’ का दर्जा मिला हुआ हो, लेकिन ज़मीन पर यहाँ की हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। सूरज ढलते ही शहर की सैकड़ों गलियां और कई मुख्य मार्ग पूरी तरह अंधेरे में डूब जाते हैं। नगर निगम के कंट्रोल रूम में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में कुल 3,465 शिकायतें पेंडिंग पड़ी हैं, जिनमें सबसे बड़ा हिस्सा यानी करीब 40 प्रतिशत (1,410 शिकायतें) अकेले रोड लाइटिंग विभाग से जुड़ा है। इसका मतलब साफ है कि शहर में दर्ज होने वाली हर तीसरी शिकायत खराब स्ट्रीट लाइटों को लेकर है, जिससे आम जनता में भारी गुस्सा देखा जा रहा है।

बता दें, स्ट्रीट लाइट के अलावा नगर निगम के अन्य विभागों का हाल भी बेहाल है। फॉगिंग और स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी 460, उद्यान विभाग की 439, जलकल की 308 और इंजीनियरिंग सेक्शन की 330 शिकायतें भी फाइलों में दबी हुई हैं। इसके अलावा अस्थायी अतिक्रमण, कार्मिक, कैटल कैचिंग और लेखा विभाग से जुड़ी दर्जनों शिकायतें भी लंबे समय से पेंडिंग हैं। पार्षदों का आरोप है कि नगर निगम सदन में हर वार्ड को 100-100 नई स्ट्रीट लाइटें देने का ऐलान तो किया गया था, लेकिन जो लाइटें लगाई गईं उनकी क्वालिटी बेहद खराब है, जो कुछ ही दिनों में बंद हो जाती हैं। पुरानी लाइटों की मरम्मत के लिए निगम के पास न तो पर्याप्त उपकरण हैं और न ही जरूरी संसाधन।

शहर के कई प्रमुख इलाके ऐसे हैं जहाँ शाम होते ही घना अंधेरा छा जाता है। फजलगंज इंडस्ट्रियल एरिया, विजय नगर से भौती बाईपास मार्ग, गोविंदपुरी के पुराने और नए पुल, तथा जीटी रोड, कालपी रोड और हमीरपुर रोड के अधिकांश हिस्से अंधेरे में डूबे रहते हैं। इसके अलावा देवकी चौराहे से रावतपुर जाने वाली मुख्य सड़क और नमक फैक्ट्री चौराहे जैसी व्यस्त जगहों पर भी रोशनी न होने के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जनता अब नगर निगम प्रशासन से तत्काल इस बदइंतज़ामी को सुधारने की मांग कर रही है।

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