लखनऊ। अब संपत्ति की रजिस्ट्री करानी हो या विवाह का पंजीकरण, आधार कार्ड से पारिवारिक रिश्ते तय नहीं किए जा सकेंगे। महानिरीक्षक निबंधन नेहा शर्मा ने सभी सहायक महानिरीक्षक निबंधन को नए दिशा-निर्देश जारी करते हुए साफ कहा है कि आधार कार्ड का इस्तेमाल केवल पहचान और पते के प्रमाण के रूप में ही किया जाएगा, पारिवारिक रिश्तों के वैधानिक प्रमाण के तौर पर नहीं।
महानिरीक्षक निबंधन ने दिया निर्देश
केंद्र और राज्य सरकार के आदेशों का हवाला देते हुए महानिरीक्षक निबंधन का कहना है कि आधार संख्या और आधार कार्ड का मूल उद्देश्य किसी व्यक्ति की पहचान स्थापित करना है। कार्ड में अंकित पिता, पति, अभिभावक या अन्य संबंधियों के नाम केवल सूचनात्मक होते हैं, जिन्हें पारिवारिक या कानूनी रिश्ते का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने भी पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि आधार पहचान का प्रमाण है, संबंध का नहीं।
इस दस्तावेजों से साबित होंगे रिश्ते
नए निर्देशों के अनुसार, स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की सभी सेवाओं और योजनाओं में पारिवारिक संबंधों का सत्यापन अब जन्म प्रमाणपत्र, परिवार रजिस्टर की नकल, उत्तराधिकार संबंधी अभिलेख या सक्षम न्यायालय द्वारा जारी प्रमाणपत्र के जरिए ही किया जाएगा। आधार कार्ड पर दर्ज पारिवारिक ब्योरे को किसी भी स्थिति में अंतिम या वैधानिक प्रमाण नहीं माना जाएगा।
आधार एप से होगा ऑफलाइन सत्यापन
महानिरीक्षक निबंधन ने एक अन्य आदेश में ऑफलाइन आधार सत्यापन व्यवस्था अपनाने के भी निर्देश दिए हैं। इसे सुरक्षित, गोपनीय और डिजिटल रूप से सत्यापित माध्यम बताते हुए कहा गया है कि संपत्ति और विवाह पंजीकरण के लिए कार्यालय में मौजूद पक्षकारों के आधार में दर्ज क्यूआर कोड के जरिए आधार एप के माध्यम से पहचान का सत्यापन सुनिश्चित किया जाए।



