लखनऊ: उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई प्रदेश कार्यकारिणी और छह क्षेत्रीय अध्यक्षों की बहुप्रतीक्षित सूची पर दिल्ली में पेंच फंस गया है। पार्टी के भीतर दिग्गजों की आपसी खींचतान और अंदरूनी पसंद-नापसंद के चलते पदाधिकारियों के नामों की घोषणा लगातार टल रही है। यूपी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह के दिल्ली दौरे और केंद्रीय नेतृत्व के साथ कई दौर की मैराथन बैठकों के बाद भी फिलहाल अंतिम सहमति नहीं बन सकी है।

काशी क्षेत्र को केंद्र में रखकर संतुलन बनाने की कोशिश

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस बार संगठन की नई टीम में ‘काशी क्षेत्र’ को मुख्य केंद्र में रखकर पूरे प्रदेश का संगठनात्मक और राजनीतिक संतुलन तय किए जाने की रणनीति है। पार्टी के भीतर कई बड़े नेताओं की अपनी-अपनी पसंद के नाम और सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक व जातीय समीकरणों (Caste Equations) को फिट बैठाने को लेकर पेंच फंसा हुआ है। बताया जा रहा है कि हर क्षेत्र के लिए दो से तीन संभावित दावेदारों के नाम दिल्ली दरबार भेजे गए हैं, जिन पर अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व को ही करना है।

चुनावी वर्ष में जोखिम नहीं लेना चाहती बीजेपी

पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि आगामी चुनावी वर्ष को देखते हुए बीजेपी संगठन के स्तर पर किसी भी तरह का कोई जोखिम (Risk) नहीं लेना चाहती। यही वजह है कि नई टीम के चयन में अत्यधिक सावधानी बरती जा रही है। संगठन में नए और ऊर्जावान चेहरों को शामिल करने, महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने और सभी जातियों को साधने की त्रिकोणीय कोशिश की जा रही है, जिसके चलते घोषणा में देरी हो रही है।

कार्यकर्ताओं में बढ़ी बेचैनी, दिल्ली दरबार पर टिकी नजरें

संगठन विस्तार में हो रहे इस अप्रत्याशित विलंब के कारण उत्तर प्रदेश के पार्टी कार्यकर्ताओं और टिकट व पद के दावेदारों के बीच अब चर्चाओं और कयासों का बाजार बेहद गर्म हो गया है। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक दावेदार अपनी गोटियां सेट करने में जुटे हैं। हालांकि, पार्टी सूत्रों का साफ कहना है कि इस पूरी सूची पर अंतिम मुहर केवल और केवल दिल्ली दरबार से ही लगेगी और इस प्रक्रिया में अभी कुछ और दिनों का समय लग सकता है।

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