देश के प्रतिष्ठित NALSAR हैदराबाद विश्वविद्यालय में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह का मुख्य अतिथि बनाए जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब तूल पकड़ चुका है। यह मामला देश की शीर्ष नियामक संस्था बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) तक जा पहुंचा, जहां BCI ने पहले तो 2026 में पास होने वाले NALSAR के सभी छात्रों के वकालत के रूप में नामांकन पर रोक लगाने का फरमान जारी कर दिया, लेकिन जबरदस्त विरोध के बाद कुछ ही घंटों के भीतर उसे अपना यह फैसला वापस लेना पड़ा।
क्या था पूरा मामला और BCI का पहला आदेश?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब विश्वविद्यालय के लगभग 450 छात्रों ने CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने का विरोध किया। यूनिवर्सिटी में कुल 1,400 विद्यार्थी हैं, और शुरुआती विरोध ज्ञापन पर अंतिम वर्ष के 70 छात्रों ने हस्ताक्षर किए थे। इस विरोध के बाद BCI ने एक कड़ा आदेश जारी करते हुए कहा कि 2026 में पास होने वाले NALSAR के किसी भी छात्र का अगले आदेश तक वकील के रूप में नामांकन नहीं किया जाएगा।
इस आदेश में एक विरोधाभास यह भी देखा गया कि एक तरफ पूरे बैच की वकालत पर ब्रेक लगा दिया गया, तो दूसरी तरफ यह भी कहा गया कि सिर्फ ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने से कोई छात्र अपने आप अयोग्य नहीं हो जाएगा। यानी आदेश की पहली लाइन में सामूहिक सजा और आगे की लाइनों में व्यक्तिगत जिम्मेदारी की बात कही गई, जिस पर कानूनी हलकों में तीखी प्रतिक्रिया हुई।
‘कॉकरोचों’ के विरोध और चेतावनी के बाद पलटा फैसला
मामला तब और गरमा गया जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े सौरव दास ने BCI के इस फैसले को “अत्यधिक, परेशान करने वाला और प्रथम दृष्टया अनुचित” करार दिया। उन्होंने कहा कि किसी समारोह के अतिथि का विरोध करने पर पूरे बैच को सामूहिक रूप से दंडित नहीं किया जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया, तो कानून के छात्र, वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता BCI कार्यालय तथा चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के आवास का घेराव करेंगे। CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी इस पर तंज कसा कि अगर सारे ‘लीगल कॉकरोच’ एक साथ आ गए तो क्या होगा।
सोशल मीडिया पर बढ़ते चौतरफा दबाव और विरोध के बीच BCI को कुछ ही घंटों के भीतर झुकना पड़ा। बार काउंसिल ने एक नया पत्र जारी कर स्पष्ट किया कि NALSAR के 2026 बैच के अधिकांश छात्र निर्दोष हैं और वे अपनी पसंद की किसी भी राज्य बार काउंसिल में नामांकन करा सकते हैं। हालांकि, कथित अभियान के मुख्य आयोजकों की भूमिका की जांच अलग से किए जाने की बात कही गई है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि शाम को पूरे बैच की वकालत पर ताला लगाने वाली BCI को रात होने से पहले आखिरकार चाबी वापस निकालनी ही पड़ी।



