डेस्क : भारत की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों को वैश्विक मंच पर एक और बड़ा सम्मान मिला है। संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) के वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर ने भारत की टेंटेटिव (अस्थाई) लिस्ट में तीन नई और बेहद महत्वपूर्ण साइट्स को शामिल कर लिया है। किसी भी ऐतिहासिक या प्राकृतिक धरोहर को ‘वर्ल्ड हेरिटेज स्टेटस’ दिलाने के सफर में यह सूची पहला और सबसे अहम कदम मानी जाती है। यूनेस्को में भारत के स्थायी मिशन द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक, इन नई साइट्स में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के अनोखे भूवैज्ञानिक लैंडस्केप और छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक धरोहर शामिल हैं।
इस लिस्ट में सबसे प्रमुख नाम अंडमान के बाराटांग द्वीप का है, जो अपने प्राकृतिक चूना पत्थर की गुफाओं और ‘जल्की’ के नाम से मशहूर मद-वोल्केनो (मिट्टी के ज्वालामुखियों) के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। इसके अलावा, बंगाल की खाड़ी में स्थित नार्कोंडम और बैरन आइलैंड्स को भी इस सूची में जगह मिली है। बैरन आइलैंड, जो भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है, और नार्कोंडम द्वीप इस क्षेत्र के अनूठे क्वाटरनरी-पीरियड सबडक्शन वोल्केनो का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन ज्वालामुखियों की अनूठी रासायनिक बनावट और भौगोलिक विशेषताएं प्राकृतिक विज्ञान के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं।
प्राकृतिक अजूबों के साथ-साथ इस फेरिस्ट में छत्तीसगढ़ का सिरपुर कल्चरल और आर्कियोलॉजिकल लैंडस्केप भी शामिल किया गया है, जो देश की प्राचीन सभ्यता और वास्तुकला की समृद्धि को दर्शाता है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और संबंधित शोधकर्ताओं की कड़ी मेहनत के बाद इन स्थलों को वैश्विक पहचान की दिशा में यह मुकाम हासिल हुआ है। इन तीनों साइट्स के टेंटेटिव लिस्ट में शामिल होने से अब इनके पूर्ण विश्व धरोहर बनने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है, जो देश के पर्यटन और धरोहर संरक्षण के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।















