डेस्क : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 4 सितंबर 2026 को एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV मिशन के जरिए अत्याधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-05 को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा गया। प्रक्षेपण SDSC के दूसरे लॉन्च पैड से किया गया।
मिशन के दौरान GSLV रॉकेट ने EOS-05 को निर्धारित सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया। इस उपलब्धि के साथ भारत की पृथ्वी अवलोकन और अंतरिक्ष आधारित निगरानी क्षमताओं को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
ISRO प्रमुख ने सफल मिशन पर जताई खुशी
ISRO प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने मिशन की सफलता पर खुशी जाहिर की। उन्होंने बताया कि GSLV ने EOS-05 जियो-इमेजिंग सैटेलाइट को उसकी निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया। EOS-05 को इस तरह विकसित किया गया है कि यह करीब 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई से भारत का लगातार व्यापक दृश्य उपलब्ध करा सके। उपग्रह से लगभग रियल टाइम इमेजिंग क्षमता मिलने की उम्मीद है।
GSLV ने पूरा किया 19वां मिशन
मिशन निदेशक थॉमस कुरियन ने इसे बेहद गर्व का क्षण बताया। उनके मुताबिक GSLV ने अपना 19वां मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया है।उन्होंने कहा कि EOS-05 एक विशेष संरचना वाला पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है। उन्होंने यह भी बताया कि GTO या सब-GTO कक्षा में GSLV के जरिए भेजा गया यह अब तक का सबसे भारी उपग्रह है।
मिशन निदेशक ने कहा कि रॉकेट को लॉन्च करने में भले ही कुछ मिनट लगते हैं, लेकिन इस सफलता के पीछे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की महीनों और वर्षों की मेहनत होती है।
51.7 मीटर ऊंचा है GSLV-F17
मिशन में इस्तेमाल किया गया GSLV-F17 करीब 51.7 मीटर ऊंचा है। इसका लिफ्टऑफ मास 420.5 टन बताया गया है। इस वजह से यह भारत के सबसे बड़े परिचालन लॉन्च व्हीकल्स में शामिल है।
जितेंद्र सिंह ने ISRO को दी बधाई
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी मिशन की सफलता की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत की अंतरिक्ष क्षमताएं लगातार नई ऊंचाइयों तक पहुंच रही हैं और ऐसी उपलब्धियां देश को वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में और मजबूत करती हैं।EOS-05 के सफल प्रक्षेपण को भारत के पृथ्वी अवलोकन कार्यक्रम और अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।













