न्यूयॉर्क: भारतीय अरबपति गौतम अडानी के खिलाफ चल रहे अमेरिकी क्रिमिनल केस को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और सकारात्मक कानूनी विश्लेषण सामने आया है। फेडरल क्रिमिनल प्रैक्टिस (संघीय आपराधिक मामलों) के जाने-माने वरिष्ठ अमेरिकी वकील क्रिस मैन के मुताबिक, न्यूयॉर्क के फेडरल जज द्वारा केस खारिज करने से पहले प्रॉसिक्यूटर से अधिक जानकारी मांगना केवल एक सामान्य प्रक्रियात्मक (Procedural) जरूरत है। इस आदेश का यह बिल्कुल भी मतलब नहीं है कि अडानी के खिलाफ यह केस आगे बढ़ेगा या उनका संकट बरकरार है।
क्या है फेडरल रूल 48(a) और जज की भूमिका?
वरिष्ठ वकील क्रिस मैन ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी कानून के रूल 48(a) के तहत, जब भी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (DoJ) किसी मामले में दर्ज चार्जशीट या आरोपों को खारिज करने का फैसला करता है, तो उसे कोर्ट से औपचारिक इजाजत लेनी होती है।
इस प्रक्रिया के तहत जज फैसला सुनाने से पहले रिकॉर्ड दुरुस्त करने के लिए सवाल पूछ सकते हैं या अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांग सकते हैं। क्रिस मैन ने कहा, “यह अपने आप में कोई अजीब बात नहीं है। अमेरिकी न्यायिक इतिहास में ऐसा कोई नया उदाहरण नहीं मिलता जहां किसी जज ने डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस को ऐसे केस पर मुकदमा चलाने के लिए मजबूर किया हो, जिसे सरकार (एग्जीक्यूटिव ब्रांच) खुद छोड़ चुकी हो।” चूंकि क्रिमिनल केस चलाना संवैधानिक रूप से कार्यपालिका का काम है, इसलिए अमेरिकी अदालतें ऐतिहासिक रूप से प्रॉसिक्यूटर के फैसलों का पूरा सम्मान करती हैं।
क्यों कमजोर हुआ अमेरिकी सरकार का केस ?
अडानी द्वारा 24 जून, 2026 को कोर्ट को सौंपे गए दस्तावेजों और कानूनी विशेषज्ञों के विश्लेषण के मुताबिक, जस्टिस डिपार्टमेंट (DoJ) का केस बंद करने का फैसला एक बेहद गहन और विस्तृत समीक्षा के बाद आया है। यह पूरा मामला अमेरिकी न्यायक्षेत्र (Jurisdiction) से बाहर का था। सभी लेन-देन और बॉन्ड ऑफरिंग्स गैर-अमेरिकी संस्थानों के बीच इंग्लिश कानून के तहत हुए थे, जो अमेरिकी सिक्योरिटीज कानून के दायरे में नहीं आते। एक पूर्व वरिष्ठ भारतीय रेगुलेटरी अधिकारी के साक्ष्यों से साबित हुआ कि जिसे कथित ‘गैर-कानूनी भुगतान’ कहा जा रहा था, वह असल में भारतीय सरकारी कंपनियों को दी गई कानूनी और पारदर्शी ‘कमर्शियल छूट’ (कीमतों में कमी) थी। मूल आरोप पत्र में चारों बड़े ट्रांज़ैक्शन में से किसी में भी निवेशकों के पैसे डूबने का कोई जिक्र या आरोप नहीं है। 2021 का बॉन्ड ब्याज समेत चुकाया जा चुका है।
हफ्तों में खत्म हो सकता है मामला
ब्रुकलिन के US डिस्ट्रिक्ट जज निकोलस गरौफिस ने DoJ को अपनी दलील का विस्तार से जवाब देने के लिए 13 जुलाई तक का समय दिया है। वकील क्रिस मैन का मानना है कि DoJ इस समय सीमा से पहले ही अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंप देगा और यह केस महीनों के बजाय कुछ ही हफ्तों में पूरी तरह खारिज हो जाएगा। कोर्ट बिना किसी लंबी सुनवाई के भी सीधे इस पर मुहर लगा सकता है।















