वर्ष 2020 के बहुचर्चित हाथरस कांड को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अपनाया है। 29 सितंबर 2020 को चंदपा गांव की दलित युवती की दर्दनाक मौत के बाद पुलिस द्वारा आधी रात को जबरन शव जलाने की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। उस वक्त राज्य सरकार ने पीड़ित परिवार के पुनर्वास, मकान और नौकरी का वादा किया था, लेकिन छह साल बीत जाने के बाद भी परिवार अपने हक के लिए भटक रहा था।
मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने UP सरकार के रवैये को बेहद ‘अड़ियल’ करार दिया और कड़ी फटकार लगाई। दरअसल, सरकार पीड़ित परिवार को अलीगढ़, कासगंज या एटा में घर देने पर अड़ी थी और साथ ही यह अजीब शर्त रख दी थी कि परिवार पहले अपने गांव का घर और जमीन सरकार को समर्पित करे। सुरक्षा कारणों और खतरे का हवाला देते हुए पीड़ित परिवार इन शहरों में जाने से लगातार इनकार कर रहा था।
हाईकोर्ट ने सरकार की सभी दलीलों और शर्तों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि पीड़ित परिवार की सुरक्षा सबसे प्राथमिक विषय है। कोर्ट ने सरकार को सख्त निर्देश जारी किए:
- 3 महीने में मकान: परिवार को आगामी 3 महीने के भीतर गाजियाबाद या नोएडा में सुरक्षित आवास दिया जाए।
- सरकारी नौकरी: परिवार के एक सदस्य को योग्यता अनुसार तुरंत नौकरी दी जाए।
गौरतलब है कि सीबीआई जांच के बाद अदालत ने तीन आरोपियों को बरी कर दिया था और एक को सजा सुनाई थी। जांच शुरू होने के बाद से ही पूरा परिवार CISF की सुरक्षा घेरे में रहने को मजबूर है, जिससे बच्चों की पढ़ाई और रोजगार पूरी तरह ठप हो चुका था। हाईकोर्ट के इस ऐतिहासिक आदेश के बाद अब पीड़ित परिवार को भयमुक्त जीवन और नया आशियाना मिलने की उम्मीद जगी है।



