देश के कई हिस्सों में इन दिनों स्वाइन फ्लू यानी H1N1 इन्फ्लुएंजा के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। दिल्ली, कर्नाटक, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में संक्रमण के मामले सामने आए हैं। दिल्ली में 2026 में H1N1 के 1,777 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि कर्नाटक में भी मामले 4,000 के पार पहुंचने की रिपोर्ट है।
स्वाइन फ्लू के लक्षण क्या हैं?
बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, शरीर में दर्द, सिरदर्द और थकान इसके सामान्य लक्षण हैं। कुछ लोगों में उल्टी या दस्त भी हो सकते हैं।
बचाव कैसे करें?
संक्रमण से बचने के लिए भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतें, हाथों को साबुन से बार-बार धोएं और खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकें। बीमार होने पर घर पर आराम करें और दूसरों के साथ नजदीकी संपर्क कम करें। फ्लू वैक्सीन के बारे में डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है।
दवा क्या लें?
स्वाइन फ्लू की स्थिति में खुद से एंटीवायरल या एंटीबायोटिक दवा लेना उचित नहीं है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार एंटीवायरल दवा, जैसे ओसेल्टामिविर, की सलाह दे सकते हैं। एंटीवायरल उपचार लक्षण शुरू होने के शुरुआती 1-2 दिनों में शुरू होने पर सबसे अधिक प्रभावी होता है।
खाने में क्या लें, क्या परहेज करें?
पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ लेते रहें। हल्का, आसानी से पचने वाला और पौष्टिक भोजन लें। आराम करना भी जरूरी है। बहुत तला-भुना, अत्यधिक मसालेदार भोजन और शरीर में पानी की कमी करने वाली चीजों से बचना बेहतर है।सांस लेने में परेशानी, लगातार तेज बुखार, सीने में दर्द, ऑक्सीजन कम होना या हालत बिगड़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में विशेष सावधानी जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी दवा का सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना न करें। लक्षण होने पर चिकित्सकीय जांच और उचित उपचार जरूर कराएं।



