लखनऊ। जिला अदालत परिसर में एक वादकारी और दिल्ली से आए वकीलों के बीच हुई कथित मारपीट के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त रुख अपनाते हुए चार अधिवक्ताओं पर बड़ी कार्रवाई की है। अदालत ने इन वकीलों के जिले की किसी भी अदालत के परिसर में प्रवेश पर अगली सुनवाई तक पूरी तरह रोक लगा दी है और साथ ही इनकी संपत्ति का पूरा हिसाब भी मांग लिया है।
कोर्ट ने क्या-क्या मांगा?
न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने जिला जज की रिपोर्ट और घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज की गहन पड़ताल की। फुटेज में चारों आरोपी वकील सौरभ कुमार वर्मा, हर्षित पांडेय, यश पांडेय और अभय प्रताप वर्मा वादकारी मोहम्मद शाकिर से मारपीट करते साफ देखे जा सकते हैं। कोर्ट ने इन चारों से पिछले 10 साल का आयकर रिटर्न, अपनी और परिवार की चल-अचल संपत्ति का पूरा विवरण, कारोबार और पिछले पांच साल में किए गए हर संपत्ति के लेन-देन का ब्योरा शपथपत्र के साथ पेश करने को कहा है।
‘काली भेड़ों’ के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी
पीठ ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ लोगों को न्याय वितरण प्रणाली पर हावी होने की इजाजत नहीं दी जा सकती। अधिकतर वकील पूरी ईमानदारी और गरिमा के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं, लेकिन वकीलों के भेष में छिपी कुछ “काली भेड़ों” की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करना बेहद जरूरी है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि मुट्ठीभर लोग न्यायपालिका को बंधक नहीं बना सकते और न्यायिक प्रक्रिया में किसी भी तरह का दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आईबी करेगी पृष्ठभूमि की जांच
अदालत ने इस मामले में शामिल बाकी वकीलों की पहचान और उनकी गतिविधियों की जांच के लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) को भी जिम्मेदारी सौंपी है। आईबी इन चारों आरोपियों की पूरी पृष्ठभूमि की छानबीन करेगी। साथ ही, जिला जज और पुलिस को हिदायत दी गई है कि इस घटना में शामिल बाकी महिला और पुरुष वकीलों को भी चिन्हित कर उनकी पूरी जानकारी अगली सुनवाई तक कोर्ट के सामने रखी जाए। पूरे मामले पर अब अगली सुनवाई 24 अगस्त को होगी।













