प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ किया है कि वेश्यालय में ग्राहक बनकर जाना कोई अपराध नहीं है। सिर्फ सेवाएं लेकर उसकी कीमत चुकाने वाले व्यक्ति के खिलाफ अनैतिक देह व्यापार विरोधी अधिनियम के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी की एकल पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए गाजियाबाद में वेश्यालय से पकड़े गए एक आरोपी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

क्या था पूरा मामला?

गाजियाबाद के भोजपुरा चौराहे के पास डीएलएफ पुलिस चौकी क्षेत्र में एक मकान में देह व्यापार की सूचना पर पुलिस ने छापा मारा था। इस दौरान मौके से महिलाओं और सात पुरुषों समेत कुल 16 लोगों को पकड़ा गया था, जिनमें याची भी शामिल था। आरोप था कि वहां मौजूद महिलाएं देह व्यापार में लिप्त थीं और अपनी कमाई का कुछ हिस्सा मकान मालिक को देती थीं। पुलिस ने याची के खिलाफ भी आरोपपत्र दाखिल किया और ट्रायल कोर्ट ने उसे सुनवाई के लिए तलब कर लिया।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

याची ने हाईकोर्ट में दलील दी कि वह सिर्फ एक ग्राहक के तौर पर वहां गया था और उसके खिलाफ वेश्यालय चलाने, उसका संचालन करने या देह व्यापार के व्यावसायिक शोषण में शामिल होने का कोई सबूत नहीं है। कोर्ट ने पाया कि आरोपी की भूमिका महज ग्राहक की थी और अनैतिक देह व्यापार विरोधी कानून के तहत अपराध साबित करने के लिए व्यावसायिक शोषण से जुड़ा तत्व होना जरूरी है।

कोर्ट ने कहा कि ग्राहक के रूप में वेश्यालय जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा चलाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। इसके साथ ही अदालत ने याची के खिलाफ लंबित आपराधिक कार्यवाही, आरोपपत्र और समन आदेश को रद्द कर दिया।

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