उत्तर प्रदेश में त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की रसोई का बजट पूरी तरह हिला कर रख दिया है। राज्य के विभिन्न जिलों में पिछले 15 से 20 दिनों के भीतर चीनी के दामों में 15 से 17 रुपये प्रति किलोग्राम तक का भारी उछाल देखने को मिला है। इस बेतहाशा बढ़ोतरी से आम जनता की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है, और आने वाले त्योहारों को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
बता दें, विभिन्न जिलों से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, दामों में हुई यह वृद्धि काफी चौंकाने वाली है। कानपुर में महज 17 दिनों के भीतर चीनी के दाम 44 रुपये से बढ़कर सीधे 60-61 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गए। इसी तरह झांसी में 18 दिनों में भाव 46 रुपये से बढ़कर 63 रुपये हो गए, शाहजहांपुर में 15 दिनों में दाम 48 से 62 रुपये प्रति किलो पहुंच गए और फर्रुखाबाद में 20 दिनों के भीतर चीनी 45 रुपये से बढ़कर 60 रुपये किलो बिकने लगी। चंदौली के नौगढ़ बाजार में तो स्थिति तब और गंभीर हो गई जब एक ही शाम के भीतर चीनी 56 रुपये से उछलकर 70 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। हालांकि गोदामों में पर्याप्त स्टॉक मौजूद होने के बावजूद व्यापारियों द्वारा मुनाफाखोरी के चलते कृत्रिम किल्लत पैदा किए जाने की बात सामने आ रही है।
केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 18 अगस्त को देश की औसत खुदरा कीमत 13 प्रतिशत बढ़कर 52.3 रुपये प्रति किलो हो गई है, जबकि एक साल पहले यह 46.34 रुपये थी। मिलों के स्तर पर भी भाव 5,400 से 5,500 रुपये प्रति क्विंटल के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं। इस बेकाबू तेजी के पीछे कई प्रमुख वजहें जिम्मेदार हैं, जिनमें नए 2026-27 सीजन में स्टॉक का अनुमान से कम रहना, गन्ने के घटे रकबे के कारण मिलों का कोटा घटना, इथेनॉल उत्पादन की ओर गन्ने का डायवर्जन, और रक्षाबंधन, नवरात्र तथा दिवाली जैसे त्योहारों के चलते अचानक बढ़ी मांग शामिल हैं।
हालाँकि सरकार ने जमाखोरी पर लगाम कसने के लिए 1 अगस्त से 30 नवंबर तक चीनी डीलरों पर स्टॉक होल्डिंग लिमिट लागू कर दी है, लेकिन मैदानी स्तर पर सख्ती न होने के कारण व्यापारी बेखौफ नजर आ रहे हैं। व्यापारियों और जानकारों का अनुमान है कि यदि समय रहते कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले त्योहारी सीजन में दीवाली तक चीनी के दाम 70 से 80 रुपये प्रति किलो तक के रिकॉर्ड स्तर को छू सकते हैं।



