रुद्रपुर। शहर की घनी आबादी वाले इलाके पहाड़गंज में पिछले कुछ दिनों से लोगों की नींद उड़ी हुई है। वजह है एक जुलाई की वह तारीख, जिसके बाद प्रशासन का बुलडोजर यहाँ बने सैकड़ों आलीशान मकानों को मलबे में तब्दील करने आ सकता है। दरअसल, किच्छा हाईवे किनारे बसा यह पूरा इलाका सरकारी जमीन पर खड़ा है, जिसे सालों पहले सियासी संरक्षण में बसाया गया और अब सत्ता बदलने के साथ यहाँ के लोगों पर गाज गिरने वाली है।

सौ रुपये के स्टांप पर खड़ी हो गई पूरी बस्ती

कहानी शुरू होती है दर्शन सिंह नाम के एक शख्स से, जिसने बेखौफ होकर सरकारी भूमि पर प्लॉटिंग कर दी। चूँकि ज़मीन सरकारी थी, इसलिए रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज का सवाल ही नहीं था। इसकी जगह सौ रुपये के स्टांप पेपर पर ज़मीन बेचने का अनोखा खेल चला। उत्तर प्रदेश के रामपुर, बहेड़ी और स्वार जैसे इलाकों से आए सैकड़ों लोगों ने 10-10 और 20-20 लाख रुपये में यहाँ ज़मीन खरीदी और आलीशान मकान खड़े कर लिए। सियासी दबाव इतना था कि सालों तक किसी ने रोकने की ज़रूरत नहीं समझी।

199 घरों तक पहुँचा नोटिस, एक जुलाई है डेडलाइन

अब शासन, सत्ता और समय बदला तो प्रशासन हरकत में आया। एडीएम पंकज उपाध्याय के नेतृत्व में कराए गए सर्वे में 350 भवन चिह्नित किए गए, जिनमें से 200 मामलों की सुनवाई पूरी कर ध्वस्तीकरण के आदेश पारित कर दिए गए। इनमें से 199 भवन स्वामियों को नोटिस तामील करा दिए गए हैं और साफ कहा गया है कि एक जुलाई तक हर हाल में इलाका खाली कर दिया जाए। अगर कोई खुद नहीं हटा तो प्रशासन का बुलडोजर अपना काम करेगा।

‘हमारा क्या दोष, बेचने वाले पर कार्रवाई हो’

पहाड़गंज के रहने वाले शेर अली कहते हैं, हमने तो सात साल पहले दर्शन सिंह से छह लाख रुपये में सौ गज ज़मीन खरीदी थी। हम मूल रूप से रामपुर के स्वार से हैं। सही ज़मीन मिली तो रिश्तेदारों को भी दिला दी। सौ रुपये के स्टांप पर खरीदी थी। पहले बेचने वाले पर कार्रवाई हो। वहीं अल्तिफा नसीर अहमद का सवाल है, अगर यह सरकारी ज़मीन है तो जब बेची जा रही थी तब कार्रवाई क्यों नहीं हुई? बिजली का मीटर लगा है, बिल भी आ रहे हैं। अतिक्रमण था तो बिजली कनेक्शन क्यों मिल गया?

’29 लाख का मकान खरीदा, अब कहाँ जाएँगे बुज़ुर्ग’

रामपुर के मुड़िया छोड़कर यहाँ बसे हुसैन वक्त ने बताया, हमें तो कहकर 29 लाख रुपये में बना-बनाया दो मंज़िला मकान दिलवाया गया। बेटा मानसिक रूप से बीमार है, हम बुज़ुर्ग लोग कहाँ जाएँ? हमारी तो नींद उड़ी हुई है। वहीं मेहंदी हसन ने माँग रखी कि जिसने अतिक्रमण कराया, उस पर भी कार्रवाई हो और रुपये दिलाए जाएँ तो लोग खुद मकान तोड़ने को तैयार हैं।

बिजली कनेक्शन देने वालों की भी होगी जाँच

इस पूरे मामले की गहराई से जाँच के लिए प्रशासन ने एसडीएम रुद्रपुर की अध्यक्षता में एक विशेष कमेटी गठित की है, जिसमें तहसीलदार, सहायक नगर आयुक्त, एसडीओ ऊर्जा निगम और प्राधिकरण के अधिकारी शामिल हैं। कमेटी तोड़फोड़ से पहले सभी पहलुओं की रिपोर्ट देगी। वहीं जिस चार एकड़ सरकारी ज़मीन पर अभी कब्ज़ा नहीं हुआ है, उसे बचाने के लिए प्रशासन तारबाड़ कराने जा रहा है। एडीएम ने साफ किया कि सरकारी ज़मीन पर अतिक्रमण करने वाला चाहे कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा।

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