उत्तर प्रदेश समेत देशभर में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और उनमें सुधार को लेकर जारी चर्चाओं के बीच भारत निर्वाचन आयोग से जुड़ी एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। चुनाव आयोग ने SIR के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां और दोहराव पहचानने के लिए इस्तेमाल किए गए विशेष सॉफ्टवेयर की विस्तृत जानकारी साझा करने से साफ इनकार कर दिया है।

बता दें, एक आरटीआई आवेदन के जवाब में चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि संबंधित सॉफ्टवेयर की जानकारी ‘ट्रेड सीक्रेट’ और बौद्धिक संपदा के तहत आती है। आयोग के अनुसार, सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) के कानूनी प्रावधानों के तहत ऐसी गोपनीय और तकनीकी जानकारियों को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है।

गौरतलब है कि आरटीआई में यह भी सवाल पूछा गया था कि क्या मतदाता सूची में फर्जी नाम या विसंगतियां पकड़ने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) या मशीन लर्निंग (ML) जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया था? हालांकि, चुनाव आयोग ने इस सवाल पर भी कोई स्थिति स्पष्ट नहीं की और चुप्पी साधे रखी। वोटर लिस्ट की पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक हलकों में जारी बहस के बीच चुनाव आयोग का यह जवाब काफी अहम माना जा रहा है।

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