डेस्क : कर्नाटक के मैंगलोर से ताल्लुक रखने वालीं डॉक्टर अनीता मिश्रा इन दिनों अपने अवधी प्रेम को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। दक्षिण भारतीय पृष्ठभूमि से आने वाली डॉ. अनीता ने शादी के बाद उत्तर प्रदेश के गोंडा को अपना घर बनाया और करीब दो दशक से यहीं अस्पताल चलाकर लोगों की सेवा कर रही हैं। वह स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं।
डॉ. अनीता की गोंडा से जुड़ने की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात गोंडा के रहने वाले अपने सीनियर सर्जन डॉ. पुण्योदय मिश्रा से हुई। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और बाद में शादी हो गई। शादी के बाद डॉ. अनीता गोंडा आ गईं।
शादी से पहले हिंदी भी नहीं आती थी
डॉ. अनीता के लिए गोंडा में बसना सिर्फ जगह बदलना नहीं था, बल्कि एक नई भाषा और संस्कृति को अपनाने का अनुभव भी था। शादी से पहले वह मुख्य रूप से कन्नड़ और अंग्रेजी में बातचीत करती थीं। हिंदी बोलने और समझने में भी उन्हें परेशानी होती थी।
हालांकि, गोंडा में लंबे समय तक रहने के दौरान उन्होंने धीरे-धीरे हिंदी के साथ स्थानीय अवधी को भी समझना शुरू कर दिया। आज स्थिति यह है कि वह मरीजों से उनकी सहज भाषा में संवाद करने की कोशिश करती हैं।
‘स्तनपान दिवस’ के कार्यक्रम का किस्सा
मीडिया से बातचीत में डॉ. अनीता ने हिंदी और अवधी से जुड़े अपने शुरुआती दिनों का एक मजेदार अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक बार उन्हें एक कार्यक्रम में स्तनपान दिवस के मौके पर बोलने के लिए आमंत्रित किया गया था।
कार्यक्रम में पहुंचने के बाद कुछ समय तक उन्हें यह समझ ही नहीं आया कि उनसे किस विषय पर बोलने के लिए कहा जा रहा है। बाद में किसी ने उन्हें बताया कि उन्हें Breastfeeding Day के अवसर पर संबोधित करना है।मंच पर पहुंचने से पहले उन्होंने मजाकिया अंदाज में वहां मौजूद लोगों से कह दिया कि आज हिंदी के साथ जो भी गलती होगी, उसके लिए वह पहले ही माफी मांगती हैं। उनका यह अंदाज लोगों को काफी पसंद आया।
मरीज की भाषा समझना क्यों जरूरी?
डॉ. अनीता का मानना है कि एक डॉक्टर के लिए सिर्फ बीमारी को समझना पर्याप्त नहीं है। मरीज के साथ भावनात्मक जुड़ाव भी जरूरी है। खासकर छोटे शहरों में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के साथ कई बार मानसिक और भावनात्मक समस्याएं भी जुड़ी होती हैं।
उनके मुताबिक, मरीज चाहता है कि उसकी बात उसी भाषा में सुनी और समझी जाए, जिसमें वह सहज महसूस करता है। जब डॉक्टर मरीज की भाषा में जवाब देता है तो उसके भीतर भरोसा पैदा होता है और उसे लगता है कि सामने वाला उसकी स्थिति को बेहतर तरीके से समझ रहा है।यही वजह है कि मैंगलोर की रहने वाली डॉ. अनीता मिश्रा ने गोंडा में रहते हुए न सिर्फ यहां की जिंदगी को अपनाया, बल्कि स्थानीय भाषा और संस्कृति से भी खुद को जोड़ लिया। उनका अवधी से जुड़ा अंदाज अब सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है।










