डेस्क : बरेली में भारी जलभराव के बाद नालों की सफाई और शहर की जल निकासी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि नालों की सफाई के नाम पर करीब 5 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में हालात बिगड़ गए। लोगों का सवाल है कि जब नाली-नालों की सफाई का दावा किया गया था तो फिर जलभराव की स्थिति क्यों बनी ?
बता दे कि बरेली के रेजीडेंसी गार्डन में करीब 6-6 फीट तक पानी भरने की बात सामने आई है। जलभराव के कारण कई घरों और दुकानों में पानी घुस गया। हालात से परेशान कुछ लोग होटल में रुकने को मजबूर हैं। BDA कॉलोनी और इंदिरा नगर में भी घरों के किचन तक पानी पहुंच गया। कई लोगों को ट्रैक्टर की मदद से रेस्क्यू किया गया।
वही सुभाषनगर, पवन विहार और राजेंद्र नगर समेत शहर के कई इलाकों में जलभराव से जनजीवन प्रभावित हुआ। सिकलापुर में सड़क पर करीब 4 फीट पानी भरने के बाद नाव चलाने की स्थिति बन गई। सरकारी दफ्तर भी जलभराव से प्रभावित हुए, जिससे कामकाज पर असर पड़ा। जिला अस्पताल, DIG बंगला और अलखनाथ मंदिर के आसपास भी पानी भरने की जानकारी है।
जलभराव की स्थिति बरेली नगर आयुक्त के आवास तक पहुंच गई। इसको लेकर मेयर, नगर आयुक्त और BDA वीसी के स्तर पर किए गए सड़क निर्माण, नाली-नालों की सफाई और जल निकासी से जुड़े दावों पर सवाल उठ रहे हैं।
शहर में जलभराव के बीच जिम्मेदार अफसरों के रील बनाने को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। जनता व्यवस्था को लेकर परेशान है और जिम्मेदारों से जवाब मांग रही है। मेयर उमेश गौतम, नगर आयुक्त संजीव मौर्य, BDA वीसी सौम्या पांडे और मंत्री अरुण सक्सेना पर जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही है। मंत्री अरुण सक्सेना शहर विधानसभा से विधायक भी हैं।










