कानपुर के चर्चित और दुर्दांत अपराधी विकास दुबे का मुठभेड़ में मारे जाने के करीब 6 साल बाद आखिरकार आधिकारिक कागजों में भी खात्मा हो गया है। कानपुर नगर निगम जोन-चार द्वारा 11 सितंबर को उसका मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है। 10 जुलाई 2020 को यूपी पुलिस और एसटीएफ के हाथों मुठभेड़ में ढेर होने के बावजूद वह कागजी तौर पर जीवित चल रहा था, जिसके चलते उसके परिजनों को संपत्ति हस्तांतरण और बीमा क्लेम में कानूनी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
बता दें, मामले की मुख्य वजह पोस्टमार्टम पर्ची और पंचनामे में पिता के नाम में हुई त्रुटि थी। रिकॉर्ड में उसके पिता का नाम ‘रामकुमार दुबे’ के स्थान पर गलती से ‘राजकुमार दुबे’ दर्ज हो गया था। इस लिपिकीय गलती के कारण स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं हो पा रहा था। थक-हारकर विकास दुबे की पत्नी ऋचा दुबे ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर प्रमाण पत्र जारी करने की गुहार लगाई थी।
हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद कानपुर के सीएमओ डॉ. हरीदत्त नेमी ने पोस्टमार्टम हाउस जाकर जांच की और रिकॉर्ड दुरुस्त कराया। जांच रिपोर्ट के आधार पर नगर निगम ने सही नाम के साथ मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर पंजीकृत डाक द्वारा बिकरू स्थित पते पर भेज दिया है। उल्लेखनीय है कि 2 जुलाई 2020 को चौबेपुर के बिकरू गांव में दबिश देने गई पुलिस टीम पर विकास दुबे और उसके गुर्गों ने अंधाधुंध गोलीबारी की थी, जिसमें सीओ समेत 8 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे।



