नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में माओवादी हिंसा के करीब-करीब खात्मे के बीच एक बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि भले ही जंगलों में बंदूक लेकर चलने वाले नक्सलियों का नेटवर्क तोड़ दिया गया है, लेकिन ‘वैचारिक नक्सली’ आज भी समाज और सत्ता के प्रभावशाली केंद्रों में मौजूद हैं और चुपके से देश को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
नीतियों तक को प्रभावित करती रही यह सोच
पीएम मोदी ने कहा कि लंबे समय तक माओवादी विचारधारा रखने वाले लोग सत्ता के अहम केंद्रों और सरकारी समितियों में सलाहकार की भूमिका में बने रहे। इनकी मौजूदगी ने देश की राष्ट्रीय नीतियों और फैसलों तक को प्रभावित किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि समाज को बांटने और गलत राह दिखाने वाली इस मानसिकता के खिलाफ पूरी मुस्तैदी से आगे बढ़ा जाए।
सशस्त्र नक्सलवाद की कमर टूटी, पर खतरा बरकरार
प्रधानमंत्री ने कहा कि सुरक्षा बलों की आक्रामक कार्रवाइयों के चलते जंगलों में सक्रिय हथियारबंद नक्सली गुटों की ताकत लगभग समाप्त हो चुकी है और देश इस गंभीर सुरक्षा संकट से बाहर निकल चुका है। लेकिन सशस्त्र विद्रोह कमजोर पड़ने के बाद भी ‘दिमागी नक्सली’ लगातार सक्रिय हैं। ये तत्व हर वक्त किसी न किसी मौके की तलाश में रहते हैं और समाज में असंतोष, अशांति व हिंसा फैलाने के लिए नए-नए तरीके अपनाते रहते हैं।
युवाओं को बचाकर विकास की धारा से जोड़ें
पीएम मोदी ने राष्ट्र से आह्वान किया कि समाज को भ्रमित करने वाले इन वैचारिक नक्सलियों की समय रहते पहचान की जाए और उन्हें पूरी तरह अलग-थलग किया जाए। उन्होंने कहा कि देश की युवा शक्ति को ऐसे बहकावों से बचाना और उसे ‘विकसित भारत’ के संकल्प से जोड़ना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा देकर ही देश तरक्की की राह पर तेजी से आगे बढ़ सकता है।



