चीन के शिनजियांग क्षेत्र में गुरुवार रात 5.1 तीव्रता का भूकंप आया। लद्दाख सीमा के पास आए इस भूकंप के झटके लेह और जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में भी महसूस किए गए। हालांकि, अभी तक किसी के हताहत होने या संपत्ति को नुकसान पहुंचने की कोई सूचना नहीं है।

रात 10:26 बजे आया भूकंप, लेह से 167 किमी दूर था केंद्र

प्राथमिक डेटा स्रोत GFZ/EMSC के अनुसार, भूकंप 5 नवंबर की रात 10:26 बजे आया। इसका केंद्र 35.6°N अक्षांश और 78.18°E देशांतर पर था। यह स्थान लद्दाख के लेह से लगभग 167 किलोमीटर उत्तर-उत्तर-पूर्व दिशा में स्थित है। भूकंप की गहराई 83 से 110 किलोमीटर के बीच बताई गई है।

लेह और कारगिल में महसूस हुए झटके

अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों GFZ/EMSC ने भूकंप की तीव्रता 5.1 दर्ज की, जबकि भारत के नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक इसकी तीव्रता 5.0 थी। लेह, कारगिल और कश्मीर घाटी के कुछ हिस्सों में लोगों ने भूकंप के झटके महसूस किए।

स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, स्थिति सामान्य है और अभी तक किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है।

लक्षद्वीप सागर और फरीदाबाद में भी आए भूकंप

गुरुवार को भारत के अन्य हिस्सों में भी हल्के भूकंप दर्ज किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, शाम 7:54 बजे लक्षद्वीप सागर में 3.2 तीव्रता का भूकंप आया। वहीं, शाम 6:33 बजे दिल्ली से सटे फरीदाबाद में 2.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इनकी तीव्रता कम होने के कारण सामान्य तौर पर लोगों को इनके झटके महसूस नहीं होते।

तिब्बती पठार में बढ़ी भूकंपीय गतिविधियां

हाल के महीनों में तिब्बती पठार और आसपास के हिमालयी क्षेत्रों में भूकंपीय गतिविधियां बढ़ी हुई हैं। इससे पहले 22 अक्टूबर को तिब्बत में 7.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था। भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, इसका केंद्र ल्हासा से करीब 400 किलोमीटर दूर था और गहराई 173 किलोमीटर दर्ज की गई थी।

नेपाल-तिब्बत सीमा पर फ्लैश फ्लड से मची थी तबाही

यह भूकंप ऐसे समय आया है, जब क्षेत्र पहले से ही प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव झेल रहा है। अगस्त में नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन से आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी।

इस आपदा में नेपाल में 1,455 लोगों की मौत हुई थी, जबकि हजारों लोग लापता हुए थे। तिब्बत की ओर भी कई लोगों के मारे जाने और सैकड़ों के लापता होने की खबरें सामने आई थीं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते तापमान, ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और चरम मौसमी घटनाओं के कारण किंगहाई-तिब्बत पठार क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम लगातार बढ़ रहा है।

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