अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सरकार द्वारा SIT गठित किए जाने के बाद भी FIR दर्ज न होने को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। अयोध्या में संतों के बीच इस पूरे प्रकरण को लेकर बड़ी चर्चा हो रही है। सवाल राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू से लेकर ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों तक उठाए जा रहे हैं।
टिन्नू पर गंभीर आरोप
मामले में सबसे पहले सवाल राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू पर उठ रहे हैं, जो एक मामूली कर्मचारी बताया जा रहा है। आरोप है कि अब वह करोड़ों की संपत्ति से जुड़ा हुआ है। उस पर VIP दर्शन पास और संपत्ति से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।
नकदी और संपत्ति को लेकर सवाल
इस प्रकरण में लवकुश मिश्रा के घर से 10 लाख रुपये नकद मिलने का दावा किया गया है। वहीं अनुकल्प मिश्रा के 65 लाख रुपये के घर और फार्म हाउस को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
केडी तिवारी ने दी सफाई
केडी तिवारी ने आरोपों पर सफाई देते हुए कहा है, “मैं चोर नहीं हूं, बेटों की कमाई से प्रॉपर्टी खरीदी है।” तिवारी का काम श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए सोना, चांदी और जेवरों का हिसाब रखना बताया जा रहा है। आरोप है कि अभी सिर्फ नकदी चोरी का मामला सामने आया है, जबकि सोना-चांदी से जुड़े पहलुओं की जांच बाकी है।
ट्रस्ट पदाधिकारियों पर भी आरोप
धर्मसेना प्रमुख संतोष दुबे ने चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। अयोध्या में संतों के बीच इन नामों को लेकर चर्चा तेज है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि चंपत राय के करीबियों ने इस दौरान मोटा पैसा बनाया और वे अपने लोगों पर आंख मूंदे रहे।
SIT जांच के अधिकारों पर नजर
अब बड़ा सवाल यह है कि SIT किन बिंदुओं पर जांच करेगी और उसे मामले की गहराई तक जाने का कितना अधिकार मिलेगा। फिलहाल FIR न होने से यह विवाद और गहरा गया है। संतों और स्थानीय लोगों की नजर अब SIT की जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।



