अयोध्या। उत्तर प्रदेश की पावन नगरी अयोध्या इन दिनों एक अनोखी वजह से दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी हुई है। रामनगरी का एक छोटा सा गांव ‘अशरफपुर टोनिया’ (सुल्तानपुर मार्ग) दुनिया के सबसे महंगे आम ‘मियाजाकी’ (Miyazaki Mango) की पैदावार से गौरवांवित हुआ है। यहाँ के निवासी और बागवानी के शौकीन व्यवसायी ओमप्रकाश सिंह ने अपने बगीचे में इस दुर्लभ जापानी आम को उगाने का अद्भुत कारनामा कर दिखाया है।

जापान का दुर्लभ आम अब अयोध्या की मिट्टी में
मूल रूप से जापान में उगाया जाने वाला मियाजाकी आम अपनी खास रंगत और स्वाद के लिए जाना जाता है। ओमप्रकाश सिंह के बगीचे में लगे मियाजाकी के पेड़ पर इस बार 8 से 10 फल आए हैं।

अनोखा रंग और वजन: इस आम का प्रत्येक फल करीब 250 ग्राम का है। आम तौर पर पकने के बाद आम पीले या हरे दिखते हैं, लेकिन मियाजाकी आम पकने के बाद गहरे लाल और बैंगनी रंग की खूबसूरत आभा बिखेरता है।

15% ज्यादा मिठास: आम की अन्य प्रजातियों की तुलना में मियाजाकी में मिठास 15 प्रतिशत अधिक होती है। इसके अलावा यह एंटी-ऑक्सीडेंट और विटामिन से पूरी तरह भरपूर होता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ₹3 लाख तक है कीमत
मियाजाकी आम को ‘सूर्य का अंडा’ (Egg of the Sun) भी कहा जाता है और यह अपनी बेहिसाब कीमत के लिए दुनिया भर में मशहूर है।

भारतीय बाजार में कीमत: ₹70,000 से ₹1,00,000 प्रति किलोग्राम।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत: ₹2,500,000 से ₹3,000,000 (ढाई से तीन लाख रुपये) प्रति किलोग्राम।

ओमप्रकाश सिंह इस बेहद कीमती पौधे को मनकापुर स्थित एक नर्सरी से खरीदकर लाए थे। दो साल पहले जब उन्होंने इसे रोपा था, तो उन्हें सफलता को लेकर कई आशंकाएं थीं, लेकिन उनका यह अनूठा प्रयोग पूरी तरह सफल रहा।

बगीचे में मौजूद हैं दुनिया के अन्य खूबसूरत आम
ओमप्रकाश के इस अनोखे बगीचे में सिर्फ मियाजाकी ही नहीं, बल्कि दुनिया की कई अन्य दुर्लभ प्रजातियों के आम भी मौजूद हैं:

आर2ई2 (R2E2 Mango): मूल रूप से ऑस्ट्रेलिया की इस प्रजाति को अपनी शानदार बनावट के कारण ‘दुनिया का सबसे खूबसूरत आम’ कहा जाता है। इसका आकार सेब जैसा होता है और छिलका सख्त होने के कारण यह लंबे समय तक खराब नहीं होता, जिससे इसका निर्यात आसान है।

बनाना मैंगो (Banana Mango): थाईलैंड की इस प्रजाति का आम पकने के बाद बिल्कुल केले की तरह दिखाई देता है।

देसी व अन्य किस्में: इनके अलावा उनकी बगिया में अंबिका, आम्रपाली, दशहरी, स्वर्णरेखा, चौसा और सफेदा जैसी बेहतरीन भारतीय प्रजातियों के पेड़ भी लहलहा रहे हैं।

अब 1 एकड़ में होगी ‘मियाजाकी’ की कमर्शियल खेती
इस शुरुआती सफलता से उत्साहित होकर ओमप्रकाश सिंह ने अब बड़े स्तर पर इसकी खेती करने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि वह जल्द ही करीब एक एकड़ क्षेत्रफल में मियाजाकी आम के पौधे रोपने जा रहे हैं। सुरक्षा के लिहाज से इस कीमती बाग की उचित बाड़बंदी (Fencing) भी की जाएगी। इसके साथ ही वह विदेशों की कुछ और दुर्लभ आम की प्रजातियों को भी अयोध्या की धरती पर उगाने की तैयारी कर रहे हैं।

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