चंडीगढ़: हरियाणा और चंडीगढ़ के सरकारी विभागों से जुड़े 645 करोड़ रुपये के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एक अन्य निजी बैंक घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी कार्रवाई बेहद तेज कर दी है। सीबीआई की टीमों ने इस महाघोटाले की कड़ियों को जोड़ते हुए तीन वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारियों के आवासों पर एक साथ छापेमारी की। इस तलाशी अभियान के दौरान जांच एजेंसी के हाथ कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल सबूत और रिकॉर्ड लगे हैं, जिनसे इस घोटाले में नौकरशाहों की संलिप्तता के बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
पंचकूला और चंडीगढ़ में CBI की रेड
सीबीआई ने यह तलाशी अभियान पंचकूला और चंडीगढ़ स्थित अधिकारियों के ठिकानों पर चलाया। दरअसल, हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत पांच आईएएस अधिकारियों—पंकज अग्रवाल, विनीत गर्ग, मोहम्मद शायिन, आरके सिंह और प्रदीप कुमार की भूमिका की जांच करने की मंजूरी सीबीआई को दी थी। इनमें से सरकार आरके सिंह और प्रदीप कुमार को पहले ही सस्पेंड (निलंबित) कर चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, हालिया छापेमारी उन्हीं अधिकारियों के ठिकानों पर हुई है जिनके खिलाफ सीबीआई को नए सुराग मिले थे।
फर्जी FDR का खौफनाक खेल
इस मामले में सीबीआई ने 8 अप्रैल को एफआईआर दर्ज की थी। इससे पहले इसकी जांच राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कर रहा था, जबकि अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से इसकी पड़ताल में जुटा है। ईडी की जांच में एक चौंकाने वाला तरीका सामने आया है। सरकारी विभागों की भारी-भरकम राशि को बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट (FDR) में निवेश किया जाना था, लेकिन आरोपियों ने बैंक कर्मियों के साथ मिलकर असली एफडीआर बनाई ही नहीं। इसके बजाय विभागों को फर्जी एफडीआर थमा दी गई और करोड़ों रुपये विभिन्न शेल कंपनियों, फर्जी संस्थाओं और निजी खातों में ट्रांसफर कर दिए गए।
11 सरकारी विभागों को लगा भारी चूना
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस सिंडिकेट ने हरियाणा और चंडीगढ़ के 11 सरकारी विभागों तथा दो नामचीन शैक्षणिक संस्थानों को कुल 645.59 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान पहुंचाया है। आंकड़ों के मुताबिक, सबसे बड़ी सेंध हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के खाते में लगाई गई, जहां से 169.27 करोड़ रुपये का गबन हुआ। इसके अलावा नगर निगम पंचकूला से 80 करोड़, नगर निगम चंडीगढ़ से 73.50 करोड़ और क्रेस्ट (CREST) के खातों से 82.02 करोड़ रुपये उड़ाए गए। सीबीआई की इस नई कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।



