मुंबई : गणेशोत्सव की शुरुआत के साथ ही देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में उत्सव का माहौल पूरी तरह से परवान चढ़ चुका है। इसी कड़ी में मुंबई के ऐतिहासिक और दूसरे सबसे पुराने सार्वजनिक गणेशोत्सव ‘चिंचपोकली सार्वजनिक उत्सव मंडल’ ने शनिवार को अपने बेहद लोकप्रिय बाप्पा ‘चिंचपोकली चा चिंतामणि’ के भव्य आगमन समारोह का आयोजन किया। इस वर्ष यह प्रतिष्ठित मंडल अपने स्थापना के 107वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है

लालबाग, परेल और गिरणगांव क्षेत्र की सड़कों पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु ढोल-ताशों की गूंज और “चिंचपोकली चिंतामणि चा विजय असो” के गगनभेदी जयघोष के बीच अपने प्रिय बप्पा के स्वागत के लिए उमड़ पड़े। हर साल की तरह इस बार भी मंडल ने एक बेहद भव्य और अनूठी थीम तैयार की है। इस वर्ष बप्पा की मूर्ति को तिरुमला तिरुपति के भगवान वेंकटेश्वर बालाजी के स्वरूप से प्रेरित होकर सजाया गया है, जिसमें गरुड़, कीर्तिमुख, शंख, चक्र और कपूर का तिलक जैसे पारंपरिक धार्मिक प्रतीक शामिल किए गए हैं।

इसके अलावा, पंडाल को हैदराबाद और भुवनगिरि स्थित प्रसिद्ध श्री वेंकटेश्वर (स्वर्णगिरि) मंदिर की तर्ज पर डिजाइन किया गया है। इसमें ऊंचे गोपुरम, दीपस्तंभ और पारंपरिक शिल्प संरचनाएं आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेंगी। मंडल के अध्यक्ष राजेंद्र डिचोलकर ने बताया कि इस कलात्मक प्रस्तुति से भक्तों को एक अलौकिक अनुभव प्राप्त होगा। इस वर्ष के आयोजन में अदाणी समूह मंडल का आधिकारिक सहयोगी है, और गणेशोत्सव शुरू होने से पहले ही तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए सैकड़ों स्वयंसेवक दिन-रात जुटे हुए हैं।

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