प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महोबा जिले के श्रीनगर थाना क्षेत्र में हुए बहुचर्चित हत्याकांड के मुख्य आरोपी पुष्पराज सिंह उर्फ बबलू की जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति समीर जैन की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि आरोपी पर हत्या जैसे गंभीर अपराध का आरोप है, जिसमें न्यूनतम सजा आजीवन कारावास है।
DGP राजीव कृष्ण भी हाईकोर्ट में हुए पेश
मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण भी हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। DGP ने पीठ को आश्वस्त किया कि भविष्य में विवेचकों द्वारा अदालत के निर्देशों का समयबद्ध तरीके से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने गंभीर अपराधों की जांच की गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रशिक्षण और जरूरी कदम उठाए जाने की बात भी कही।
बचाव पक्ष ने जमानत के लिए दी ये दलील
सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता ने दलील दी कि घटना के समय दोनों पक्षों के बीच संघर्ष हुआ था। इस दौरान आरोपी पक्ष के लोग भी घायल हुए थे और सक्षम न्यायालय के आदेश के बाद उनकी ओर से भी प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
बचाव पक्ष ने घटनास्थल के वीडियो फुटेज के समय और गोलियों की संख्या को लेकर सामने आए विरोधाभासों का भी हवाला दिया। अधिवक्ता ने आरोपी को निर्दोष बताते हुए कहा कि वह एक साल से अधिक समय से जेल में बंद है, इसलिए उसे जमानत दी जानी चाहिए।
राज्य सरकार और वादी पक्ष ने किया विरोध
वहीं राज्य सरकार और वादी पक्ष के अधिवक्ताओं ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। उनकी ओर से कहा गया कि मृतक की बहन घटना की चश्मदीद गवाह हैं और उन्होंने आरोपी द्वारा गोली चलाकर हत्या किए जाने की पुष्टि की है। वादी पक्ष ने यह भी दलील दी कि आरोपी पक्ष की ओर से घटना के 12 दिन बाद दी गई अर्जी बाद की सोच का नतीजा थी।इन दलीलों और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी पुष्पराज सिंह उर्फ बबलू की जमानत याचिका खारिज कर दी।












