लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश और दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा के बांग्लादेश में हुए सत्ता परिवर्तन से जुड़े बयान के बाद सीएम योगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता का रास्ता जनादेश से निकलता है, अराजकता से नहीं। सीएम ने आरोप लगाया कि कुछ शक्तियां चुनाव सुधार और लोकतंत्र के नाम पर देश में अस्थिरता पैदा करना चाहती हैं।

‘अराजकता से देश के लोकतंत्र को नहीं हिलाया जा सकता’

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर लिखा कि लोकतंत्र में सत्ता का मार्ग जनादेश से निकलता है, अराजकता से नहीं। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की तर्ज पर भारत में सत्ता परिवर्तन का सपना देखने वाली शक्तियां युवाओं के हाथों में राष्ट्र निर्माण की मशाल के बजाय अराजकता के औजार थमाना चाहती हैं।

सीएम योगी ने आगे कहा कि चुनाव सुधार का मुखौटा, न्याय का नारा और लोकतंत्र की दुहाई देकर देश में अस्थिरता के बीज बोने वालों को समझना चाहिए कि भारत का लोकतंत्र जनविश्वास की मजबूत नींव पर खड़ा है। उन्होंने इसे विशाल वटवृक्ष बताते हुए कहा कि षड्यंत्रों के अंधड़ इसे हिला नहीं सकते।

‘युवाशक्ति देश का भविष्य संवारने के लिए है’

सीएम योगी ने अपने बयान में युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि देश की युवाशक्ति भारत का भविष्य संवारने के लिए है, न कि किसी की सत्ता की भूख मिटाने के लिए।

उन्होंने राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता ने राजनीति के इन मारीचों और कालनेमियों को पहचानकर सत्ता से दूर रखा है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि अब ये ताकतें देश को अराजकता की आग में झोंककर सत्ता हासिल करना चाहती हैं।

उन्होंने कहा कि देश ऐसी राजनीतिक साजिश को कभी सफल नहीं होने देगा।

नेहा बोरा के बयान से शुरू हुआ विवाद

दरअसल, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने 14 अक्टूबर को बांग्लादेश के सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट (SSF) के छठे राष्ट्रीय सम्मेलन के मौके पर दिए गए अपने संदेश में कहा था, ‘बांग्लादेश ने हमें क्रांति का रास्ता दिखाया।’

उनके इस बयान को भारत में जारी विरोध-प्रदर्शनों और राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में देखा जा रहा है। इसी के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बांग्लादेश की तर्ज पर भारत में सत्ता परिवर्तन की उम्मीद रखने वाली शक्तियों पर निशाना साधा।

क्या हुआ था बांग्लादेश में?

साल 2024 में बांग्लादेश में छात्रों के नेतृत्व में बड़ा आंदोलन हुआ था। शुरुआत में यह आंदोलन सरकारी नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था को लेकर था, लेकिन बाद में इसका दायरा बढ़ गया और यह सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गया।

आंदोलन के दौरान हिंसा की कई घटनाएं सामने आईं। इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा और बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन हुआ।

इसी घटनाक्रम का हवाला देते हुए नेहा बोरा ने बांग्लादेश को क्रांति का रास्ता दिखाने वाला बताया था। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनादेश की अहमियत पर जोर देते हुए अराजकता के जरिए सत्ता परिवर्तन की कोशिशों का विरोध किया।

विरोध-प्रदर्शनों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज

नेहा बोरा के बयान और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिक्रिया के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। सीएम योगी ने जहां लोकतांत्रिक व्यवस्था, जनादेश और राष्ट्रीय स्थिरता को प्राथमिकता देने की बात कही, वहीं उनके बयान को मौजूदा विरोध-प्रदर्शनों के संदर्भ में देखा जा रहा है।

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