उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने नई राजनीतिक पार्टी ‘जननीति भारत’ के गठन का ऐलान किया है। पार्टी 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी में है। दिव्या मित्तल ने पार्टी की विचारधारा और कार्यप्रणाली को लेकर जनता के सामने तीन प्रमुख वचन रखे हैं। इनमें जनता की भागीदारी से नीतियां बनाना, जरूरत के आधार पर बिना भेदभाव फैसले लेना और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता के साथ जवाबदेही सुनिश्चित करना शामिल है।

दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि राजनीति में जनता पर राज किया जाता है, जबकि जननीति में राज जनता का होगा। उन्होंने ऐसी व्यवस्था बनाने की बात कही, जिसमें चुनाव के दिन ही नहीं, बल्कि पूरे पांच साल जनता की बात सुनी जाए।

जननीति भारत के तीन प्रमुख वचन क्या हैं?

दिव्या मित्तल ने पार्टी के गठन के साथ तीन वचन सामने रखे हैं। उनके मुताबिक, इनका उद्देश्य शासन व्यवस्था में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाना और सरकारी फैसलों को जनता की जरूरतों से जोड़ना है।

  • पहला वचन: जन से नीति, नीति से भारत — नीतियां बनाने में आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना।
  • दूसरा वचन: जरूरत से फैसला और फैसले में बराबरी — जाति, धर्म और हैसियत के बजाय जरूरत के आधार पर निर्णय लेना।
  • तीसरा वचन: जनता को हिसाब और हिसाब से सुधार — सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाना और जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करना।

जनता की भागीदारी से बनेंगी नीतियां

दिव्या मित्तल ने कहा कि नीतियां बनाने से पहले जनता से पूछा जाना चाहिए कि उसे क्या चाहिए और उसकी समस्याएं क्या हैं। इसके बाद विशेषज्ञों की मदद से जरूरतों को पूरा करने का तरीका तय किया जाना चाहिए।

उन्होंने देवकली देवी का उदाहरण देते हुए बताया कि एक महिला के घर में पानी की समस्या थी, लेकिन उन्होंने स्कूल बनाने की मांग की थी। स्कूल का काम शुरू हुआ, लेकिन बाद में जमीन जंगल की होने की जानकारी सामने आने पर काम रुक गया। दिव्या मित्तल ने इस उदाहरण के जरिए सवाल उठाया कि गरीबों के जरूरी काम अक्सर लंबे समय तक क्यों अटके रहते हैं।

उन्होंने कहा कि खेती से जुड़ी नीतियां किसानों के अनुभव के आधार पर और व्यापार से जुड़ी नीतियां छोटे व्यापारियों की समस्याओं को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए। साथ ही, आने वाली पीढ़ियों की जरूरतों को भी नीतियों में जगह मिलनी चाहिए।

जाति-धर्म नहीं, जरूरत के आधार पर होंगे फैसले

जननीति भारत के दूसरे वचन के तहत दिव्या मित्तल ने कहा कि सरकारी फैसले लोगों की जाति, धर्म, पहचान या हैसियत देखकर नहीं लिए जाने चाहिए। उन्होंने सड़क निर्माण का उदाहरण देते हुए बताया कि किसी प्रभावशाली व्यक्ति के हस्तक्षेप से सड़क का रास्ता बदलने पर कई परिवार प्रभावित हो सकते हैं, जबकि दूसरे रास्ते से बड़ी आबादी को लाभ मिल सकता है।

उनके मुताबिक, विकास कार्यों की योजना बनाते समय प्रभावित लोगों की राय ली जानी चाहिए, ताकि सार्वजनिक हित से जुड़े फैसले किसी एक व्यक्ति के प्रभाव में न बदलें।

बेटियों की सुरक्षा के लिए मोबाइल ऐप का प्रस्ताव

दिव्या मित्तल ने बेटियों की सुरक्षा के लिए भी एक मॉडल का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि लड़कियां मोबाइल ऐप के जरिए उन स्थानों को चिह्नित कर सकेंगी, जहां उन्हें असुरक्षा महसूस होती है।

उनके प्रस्ताव के मुताबिक, किसी स्थान पर 100 निशान इकट्ठा होने पर वहां स्ट्रीट लाइट, पुलिस गश्त और कैमरे लगाने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा से जुड़े फैसले उन लोगों की राय के आधार पर भी होने चाहिए, जो रोज उन रास्तों से गुजरते हैं।

दिव्या मित्तल ने कहा कि यही सिद्धांत सड़क, हैंडपंप और अन्य विकास कार्यों पर भी लागू होना चाहिए। जहां जरूरत अधिक होगी, वहां काम को प्राथमिकता दी जाएगी।

सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही का वादा

जननीति भारत के तीसरे वचन के तहत दिव्या मित्तल ने सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने की बात कही। उन्होंने कहा कि लाभार्थियों को समय पर यह जानकारी मिलनी चाहिए कि उनका आवेदन मंजूर हुआ है या नहीं, ताकि बिचौलियों के जरिए पैसे मांगने जैसी स्थितियों को रोका जा सके।

उन्होंने गांवों में होने वाले विकास कार्यों की जानकारी मोबाइल फोन पर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी रखा। इसके जरिए लोग देख सकेंगे कि कहां सड़क, नाली या खड़ंजा बन रहा है, उस पर कितना पैसा खर्च हो रहा है, काम पूरा होने की समयसीमा क्या है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

हरे, पीले और लाल रंग से होगी काम की निगरानी

दिव्या मित्तल ने सरकारी कामों की गुणवत्ता पर जनता की राय लेने के लिए तीन रंगों वाली व्यवस्था का प्रस्ताव रखा।

  • हरा रंग: काम अच्छा है।
  • पीला रंग: काम अधूरा है।
  • लाल रंग: काम खराब है।

उन्होंने कहा कि सड़क, स्कूल, अस्पताल और राशन की दुकान जैसी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति के बारे में वहां जाने वाले लोग बेहतर जानकारी दे सकते हैं। इस व्यवस्था में जनता की प्रतिक्रिया के आधार पर कमियों की पहचान कर सुधार करने की बात कही गई है।

जननीति भारत में विधायकों की भूमिका क्या होगी?

दिव्या मित्तल ने कहा कि उनकी पार्टी के विधायक जनता और सरकार के बीच संवाद का माध्यम बनेंगे। जो लोग लिखकर अपनी समस्या नहीं बता सकते या मोबाइल ऐप का इस्तेमाल नहीं कर सकते, विधायक उनकी मदद करेंगे और उनकी समस्याओं को सरकार तक पहुंचाएंगे।

उन्होंने कहा कि विधायक जनता से जुड़ी समस्याओं को सामने लाने और लोगों की आवाज को शासन तक पहुंचाने का काम करेंगे।

घर-घर जाकर अभियान चलाने की तैयारी

दिव्या मित्तल ने कहा कि जननीति भारत का अभियान पोस्टरों और विज्ञापनों के बजाय घर-घर जाकर चलाया जाएगा। उन्होंने लोगों से अपने गांव और कस्बे में उन्हें बुलाने तथा इस अभियान से जुड़ने की अपील की।

अपने वीडियो संदेश में उन्होंने लोगों से तीन अन्य लोगों तक पार्टी का संदेश पहुंचाने और ‘राजनीति नहीं, जननीति’ लिखने का आग्रह किया।

2027 के विधानसभा चुनाव पर नजर

जननीति भारत के गठन के साथ दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई शुरुआत की है। पार्टी का घोषित फोकस जनता की भागीदारी, जरूरत के आधार पर फैसले और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता पर है। अब 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को कितना समर्थन मिलता है और उसके वादे किस तरह लागू किए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

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