इंडियन आर्मी की आर्टिलरी कैपेसिटी में बड़ी बढ़ोतरी होने की संभावना है। सरकार 300 से ज़्यादा K9 Vajra-T ऑटोमैटिक ट्रैक्ड गन (सेल्फ-प्रोपेल्ड ट्रैक्ड आर्टिलरी गन) खरीदने के प्रपोज़ल पर आगे बढ़ सकती है। इस डील की अनुमानित कीमत लगभग 23,000 करोड़ रुपये हो सकती है, जिससे यह हाल के सालों में आर्मी के लिए प्रपोज़्ड सबसे बड़ी आर्टिलरी डील में से एक बन जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, इस प्रपोज़ल को इस हफ़्ते मंज़ूरी के लिए डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड के सामने रखा जा सकता है।

K9 Vajra-T एक 155 mm/52 कैलिबर की ऑटोमैटिक ट्रैक्ड तोप है। इसे साउथ कोरिया के हनवा एयरोस्पेस ने डिज़ाइन किया है और भारत में लार्सन एंड टूब्रो (L&T) ने इसे बनाया है। यह तोप 40 किलोमीटर से ज़्यादा दूरी तक हमला कर सकती है और अपनी तेज़ फायरिंग क्षमता, सटीकता और अलग-अलग इलाकों में काम करने की क्षमता के लिए जानी जाती है।
सेना के अधिकारियों का कहना है कि सिस्टम के शामिल होने के बाद से इसका प्रदर्शन अच्छा रहा है। बता दे कि पहले बैच में 100 तोपों का ऑर्डर 2017 में लगभग 4,500 करोड़ रुपये में दिया गया था। इनकी सप्लाई 2021 में तय समय से पहले पूरी हो गई। दिसंबर 2024 में, रक्षा मंत्रालय ने 100 और K9 Vajra-T तोपों के लिए L&T के साथ 7,628.70 करोड़ रुपये का एक और कॉन्ट्रैक्ट साइन किया। इससे रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की भारत की कोशिशों को मज़बूती मिलेगी।

K9 Vajra-T को शुरू में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर तैनात किया गया था। लेकिन मई 2020 में, लद्दाख में भारत-चीन के बीच हुई सैन्य झड़प के बाद इन्हें ऊंचाई वाले इलाकों में भेजा गया था। इस प्लेटफॉर्म ने सब-ज़ीरो तापमान में भी असरदार तरीके से काम करने की क्षमता दिखाई है, जिससे यह मुश्किल पहाड़ी इलाकों के लिए उपयोगी है।

काफी तेजी से चल रहा है तोपखाना आधुनिकीकरण

यह खरीद इंडियन आर्मी के बड़े आर्टिलरी मॉडर्नाइज़ेशन प्रोग्राम का हिस्सा है। आर्मी के लंबे समय के “मीडियमाइज़ेशन” प्लान का मकसद 2042 तक 155mm गन को स्टैंडर्ड आर्टिलरी कैलिबर बनाना है। आर्मी ने आने वाले दशकों के लिए 2027, 2042 और 2047 को ध्यान में रखते हुए मॉडर्नाइज़ेशन प्लान तैयार किए हैं।

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