उत्तर प्रदेश के वाराणसी में संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज के 650वें जयंती वर्ष के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा राष्ट्रव्यापी ‘गुरु रविदास महाराज समरसता संकल्प अभियान’ की शुरुआत होने जा रही है। इस अभियान का भव्य शुभारंभ 29 जुलाई, बुधवार को गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर संत रविदास जी की जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर, वाराणसी से होगा। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दोपहर करीब तीन बजे जन्मस्थली पहुंचेंगे और संत रविदास के चरणों में मत्था टेककर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
इस अभियान के तहत संत रविदास जी की पावन जन्मभूमि की मिट्टी को 131 कलशों में भरा जाएगा। इन कलशों का संत-महात्माओं और प्रबुद्धजनों की उपस्थिति में विशेष पूजन किया जाएगा। 29 जुलाई को ये कलश उत्तर प्रदेश के 98 संगठनात्मक जिलों तथा देश के 27 राज्यों एवं छह जोनों के लिए रवाना किए जाएंगे। इसके माध्यम से संत रविदास के सामाजिक समरसता, समानता और मानवता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। इस अवसर पर एक विशाल समरसता संकल्प सभा का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें 25 हजार लोगों के शामिल होने का लक्ष्य रखा गया है।
दिग्गज नेताओं और संतों की रहेगी गरिमामयी उपस्थिति
इस भव्य आयोजन में राष्ट्रीय स्तर के कई दिग्गज नेता और संत समाज के लोग शिरकत करेंगे। इनमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद्र बैरवा, पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह, और समाज कल्याण राज्य मंत्री असीम अरुण सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके साथ ही डेरा सच्चखंड बल्लां के प्रमुख और देशभर से आए प्रख्यात संत भी उपस्थित रहेंगे।
पांच चरणों में चलेगा राष्ट्रव्यापी अभियान
भाजपा अनुसूचित वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य ने जानकारी दी कि यह अभियान पांच चरणों में आयोजित किया जाएगा। 29 जुलाई से 10 सितंबर 2026 तक ‘कलश वंदन अभियान’, 29 जुलाई से 31 अगस्त तक ‘संत संपर्क अभियान’, 5 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 तक जालंधर से काशी तक ‘समरसता यात्रा’, और 26 नवंबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक ‘छात्रावास संपर्क अभियान’ चलाया जाएगा। इसके अतिरिक्त, श्री रविदास घाट और पार्क में 11,000 दीप प्रज्ज्वलित कर ‘दीपोत्सव’ मनाया जाएगा। यह पूरा सिलसिला आगामी 20 फरवरी 2027 को माघी पूर्णिमा के दिन संत रविदास जयंती तक निरंतर जारी रहेगा।



