Chandigarh: पंजाब के लाखों परिवारों को प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी से बड़ी राहत देने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की सरकार ने एक ऐतिहासिक और बेहद सख्त कदम उठाया है। राज्य सरकार ने निजी अनएडेड (गैर-सहायता प्राप्त) स्कूलों के लिए एक नया व्यापक नियामक ढांचा तैयार किया है, जिसके तहत अब कोई भी स्कूल सालाना 5 फीसदी से ज्यादा फीस नहीं बढ़ा सकेगा। इस फैसले को तुरंत प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सरकार जल्द ही एक अध्यादेश लाएगी, जिसे आगामी विधानसभा सत्र में देश के सबसे सख्त कानून के रूप में पेश किया जाएगा।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने स्पष्ट किया कि 5 फीसदी की यह सीमा सिर्फ ट्यूशन फीस पर ही नहीं, बल्कि स्कूलों द्वारा वसूले जाने वाले अन्य सभी अनिवार्य फंडों और खर्चों पर भी लागू होगी। इसके अलावा, सरकार ने यह भी अनिवार्य कर दिया है कि जिन निजी स्कूलों ने पिछले 3 सालों के दौरान सालाना सीमा का उल्लंघन करते हुए 15 फीसदी से अधिक की फीस बढ़ोतरी की है, उन्हें माता-पिता से वसूली गई वह अतिरिक्त राशि तुरंत वापस करनी होगी। सीएम मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि अमृतसर की एक दुखद घटना के बाद उन्हें पिछले 24 घंटों में अभिभावकों के सैकड़ों फोन आए, जिसके बाद बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह कड़ा फैसला लिया गया है।

पिछली सरकारों पर साधा निशाना, जवाबदेही होगी तय
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि प्राइवेट स्कूलों का फीस ढांचा ‘पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एक्ट, 2016’ के अधीन आता है। लेकिन पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा 2019 में किए गए संशोधनों (डिस्क्लोजर मैकेनिज्म) के कारण इस कानून को बेहद कमजोर कर दिया गया था, जिससे स्कूलों को मुनाफाखोरी और मनमानी फीस बढ़ाने की खुल्लम-खुल्ला छूट मिल गई थी। नया कानून इस लूट-खसूट को हमेशा के लिए खत्म कर शिक्षा क्षेत्र में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही बहाल करेगा।

नियम तोड़ने पर रद्द होगी मान्यता, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की कमेटी करेगी ऑडिट
नये नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ सरकार ने चरणबद्ध जुर्माना प्रणाली तैयार की है:

पहला उल्लंघन: प्राइमरी स्कूलों के लिए 30,000 रुपये और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के लिए 1 लाख रुपये का जुर्माना।

दूसरा उल्लंघन: जुर्माना बढ़ाकर क्रमशः 60,000 रुपये और 2 लाख रुपये किया जाएगा।

तीसरा उल्लंघन: भारी आर्थिक जुर्माने के साथ स्कूल की मान्यता को पूरी तरह रद्द कर दिया जाएगा।

इसके साथ ही, जिला स्तरीय रेगुलेटरी बॉडी (जिसकी अगुवाई जिले के डीसी या एडीसी करते हैं) को सिविल कोर्ट के बराबर शक्तियां दी गई हैं, जो शिकायतों पर 15 दिनों के भीतर जांच शुरू कर 60 दिनों में फैसला सुनाएगी। सरकार प्राइवेट स्कूलों के वित्तीय ऑडिट के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CA) की एक विशेष कमेटी बनाने पर भी विचार कर रही है, जो पिछले 3 से 5 सालों के स्कूल रिकॉर्ड्स, खर्चे और रिजर्व फंड की जांच करेगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि फीस बढ़ोतरी जायज थी या नहीं।

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