नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही बहुचर्चित फिल्म ‘रामायण’ अपने पहले गाने के रिलीज होते ही बड़े विवादों के घेरे में आ गई है। फिल्म में भगवान राम और माता सीता के पवित्र विवाह पर फिल्माया गया गाना ‘मंगल रंग’ जारी किया गया है, लेकिन इसके रिलीज होते ही सोशल मीडिया से लेकर आध्यात्मिक हलकों तक विरोध के स्वर मुखर हो गए हैं। दर्शकों और श्रद्धालुओं का मुख्य ऐतराज गाने की धुन में कव्वाली और सूफी संगीत के तत्वों को शामिल किए जाने पर है।
ऑस्कर विजेता संगीतकार ए.आर. रहमान द्वारा कंपोज और अरिजीत सिंह व श्रेया घोषाल द्वारा गाए गए इस गीत को लेकर सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि त्रेतायुग की पौराणिक कथा में पारंपरिक शास्त्रीय संगीत के बजाय कव्वाली शैली का इस्तेमाल क्यों किया गया। कई यूज़र्स इसकी तुलना मनोज मुंतशिर के पिछले विवादित बयानों और रहमान के पुराने सूफी गानों से कर रहे हैं। वहीं, एक अन्य दृश्य में सीता जी द्वारा श्री राम की रस्म देखने पर भी आपत्ति जताई गई, जिस पर मेकर्स ने सफाई देते हुए कहा कि यह हल्दी नहीं बल्कि मिथिला की पारंपरिक ‘चुमावन’ रस्म है।
इस विवाद का असर अब धार्मिक नगरी अयोध्या तक पहुंच गया है। अयोध्या के कई साधु-संतों और धर्मशास्त्रियों ने गाने के प्रति कड़ा विरोध जताते हुए कहा है कि भगवान राम और सीता की मर्यादा के साथ कोई भी समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संतों ने इस फिल्म को देखना ‘पाप के समान’ बताते हुए इसके पूर्ण बहिष्कार का ऐलान किया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद फिल्म के मेकर्स और स्टारकास्ट पर जनता की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने का भारी दबाव बन गया है।



