मुंबई: बॉम्बे हाई कोर्ट ने अभिनेता इमरान खान की ओर से ‘लीव इंडिया नोटिस’ को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई 2 नवंबर 2026 तक टाल दी है। केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को मौखिक आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई तक इमरान खान के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इमरान को 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया गया था।
FRRO के नोटिस को हाई कोर्ट में दी चुनौती
अभिनेता इमरान खान ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (FRRO), मुंबई की ओर से 14 अक्टूबर 2026 को जारी लीव इंडिया नोटिस को चुनौती दी है। इस नोटिस में उन्हें 28 अक्टूबर या उससे पहले भारत छोड़ने का आदेश दिया गया था।
इमरान खान की टीम के मुताबिक, याचिका में नोटिस जारी करने की प्रक्रिया और उसके कानूनी आधार पर सवाल उठाए गए हैं। उनका आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना भारत छोड़ने का निर्देश जारी कर दिया।
OCI कार्ड और भारत में रहने के अधिकार का दिया हवाला
इमरान खान की जनसंपर्क टीम की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अभिनेता के पास वर्ष 2006 से ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) का दर्जा है और वह लगभग दो साल की उम्र से भारत में रह रहे हैं।
याचिका में उन्होंने अपनी शिक्षा, पेशेवर जीवन और पारिवारिक संबंधों का हवाला देते हुए भारत के साथ अपने लंबे जुड़ाव का उल्लेख किया है।
अभिनेता का कहना है कि नोटिस में इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 के उन विशिष्ट प्रावधानों का उल्लेख नहीं किया गया है, जिनके उल्लंघन का आरोप उन पर लगाया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि नोटिस जारी करने से पहले न तो कारण बताओ नोटिस दिया गया और न ही सुनवाई का अवसर प्रदान किया गया।
10 अक्टूबर की घटना से जुड़ा है मामला
याचिका के मुताबिक, यह मामला 10 अक्टूबर 2026 को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान और नाना चौक के पास हुई एक घटना से जुड़ा है। इमरान खान के अनुसार, वह अपनी गाड़ी की ओर लौट रहे थे, तभी मीडिया कर्मियों ने उन्हें घेर लिया और पुलिस ने उन्हें कुछ समय के लिए हिरासत में ले लिया।
अभिनेता ने किसी प्रतिबंधित या बैरिकेड वाले क्षेत्र में प्रवेश करने और पुलिस के निर्देशों की अवहेलना करने के आरोपों से इनकार किया है। उनकी टीम का कहना है कि वह प्रदर्शन के आयोजक नहीं थे और न ही उसमें भाग लेने पहुंचे थे, बल्कि यह देखने गए थे कि वहां क्या हो रहा है।
FRRO ने जारी किया कारण बताओ नोटिस
इमरान खान की टीम के बयान के अनुसार, याचिका दाखिल होने के बाद FRRO ने एक विस्तृत कारण बताओ नोटिस (SCN) जारी किया। इसमें पूछा गया कि 10 अक्टूबर की सभा में उनकी मौजूदगी के आधार पर उनका OCI पंजीकरण क्यों रद्द नहीं किया जाना चाहिए।
टीम का दावा है कि अभिनेता को सभा स्थल पर पहुंचने से पहले ही मीडिया ने घेर लिया था और पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इसके बाद उन्हें परिवार के सदस्यों के साथ येलो गेट पुलिस स्टेशन ले जाया गया और बाद में छोड़ दिया गया।
याचिका में 10 अक्टूबर को गामदेवी पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के प्रावधानों के तहत दर्ज FIR का भी उल्लेख किया गया है।
FIR और आरोपों को लेकर उठाए सवाल
याचिका में कहा गया है कि इमरान खान के खिलाफ जारी नोटिस का संबंध उक्त FIR से प्रतीत होता है, जबकि उनके अनुसार, नोटिस जारी होने के समय न तो चार्जशीट दाखिल की गई थी और न ही आरोप तय किए गए थे।
अभिनेता ने इस कार्रवाई को अनावश्यक बताते हुए संबंधित कानूनी सुरक्षा उपायों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। उन्होंने नोटिस जारी किए जाने के समय और परिस्थितियों पर भी सवाल उठाए हैं।
नोटिस रद्द करने और अंतरिम राहत की मांग
इमरान खान ने हाई कोर्ट से लीव इंडिया नोटिस रद्द करने और FRRO की कार्रवाई के आधार से जुड़े रिकॉर्ड तथा सामग्री को सार्वजनिक करने की मांग की है।
उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि मामले की सुनवाई लंबित रहने तक उन्हें भारत से बाहर भेजने, निर्वासित करने, ब्लैकलिस्ट करने या उनके OCI पंजीकरण को प्रभावित करने वाली किसी भी कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की जाए।
अब इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट में अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को होगी। तब तक केंद्र सरकार की ओर से अदालत में दिए गए मौखिक आश्वासन के अनुसार इमरान खान के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।



