दिल्ली में आयोजित विशेष सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण विधेयक और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा महिला सशक्तिकरण और जेंडर जस्टिस के पक्ष में रही है, लेकिन वर्तमान सरकार इस मुद्दे को केवल राजनीतिक नारे के रूप में इस्तेमाल कर रही है।

बता दें, अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा महिलाओं के सम्मान की बात तो करती है, लेकिन अपने संगठन और शासित राज्यों में महिलाओं की भागीदारी सीमित है। उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा शासित राज्यों में कितनी महिला मुख्यमंत्री हैं और संगठन में महिलाओं को कितना प्रतिनिधित्व दिया गया है। अखिलेश यादव ने कहा भारतीय जनता पार्टी केवल नारी का नारा बनाना चाहती है।

उन्होंने कहा कि समाज में वास्तविक बदलाव महिलाओं के योगदान से ही संभव है और उनकी पार्टी डॉ. राम मनोहर लोहिया की विचारधारा पर चलकर सामाजिक न्याय को आगे बढ़ा रही है। अखिलेश ने यह भी कहा कि पीडीए में ‘A’ का मतलब आधी आबादी है, जो महिलाओं के सम्मान और भागीदारी को दर्शाता है।

SIR को लेकर भी उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि यह प्रक्रिया एनआरसी का ही एक रूप प्रतीत होती है। उन्होंने दावा किया कि फॉर्म-7 के जरिए कई लोगों के वोट काटे गए, जिससे लोकतंत्र प्रभावित हुआ है।

अखिलेश यादव ने आगे कहा कि भाजपा सरकार का असली उद्देश्य सत्ता में बने रहना है और हाल ही में लाए गए विधेयक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि मेरठ और नोएडा जैसे क्षेत्रों में महिलाएं न्याय के लिए सड़कों पर उतर रही हैं, जो व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। अखिलेश यादव ने कहा भारतीय जनता पार्टी की बड़ी हेराफेरी को हमने पकड़ा हैं। भाजपा का असली लक्ष्य सत्ता में रहना है।

इस दौरान संसद में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 भी पेश किए गए, जिन पर चर्चा जारी है।

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