राजस्थान में बच्चों के नामों को लेकर शुरू हुआ ‘सार्थक नाम अभियान’ अब एक बड़ा विवाद बन गया है। राज्य सरकार ने 3000 नामों की सूची जारी की है और अपमानजनक नामों को बदलने का सुझाव दिया है। शिक्षा विभाग का कहना है कि कई बच्चों के नामों का स्कूल में मजाक उड़ाया जाता है, जिससे उनके आत्मसम्मान पर असर पड़ता है।

सरकार का तर्क— बढ़ेगा बच्चों का आत्मविश्वास
बता दें, राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य बच्चों को सम्मानजनक और सकारात्मक पहचान देना है। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए नए नाम सुझाए गए हैं और अभिभावकों की सहमति से नाम बदलने की योजना बनाई गई है। इसका लक्ष्य बच्चों को ऐसा नाम देना है, जिस पर वे गर्व महसूस करें।

विपक्ष ने बताया निजी जिंदगी में दखल
विपक्ष ने इस कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि नाम रखने का अधिकार अभिभावकों का है और इसमें सरकारी हस्तक्षेप गलत है।

विशेषज्ञों की राय— नाम का असर पड़ता है
वहीं, मनोचिकित्सक भी इस मुद्दे पर अपनी राय दे रहे हैं। उनका कहना है कि अगर बच्चों के नामों का बार-बार मजाक उड़ाया जाता है, तो इसका असर उनके मानसिक विकास पर पड़ सकता है, जिससे आत्मविश्वास में कमी आ सकती है। इस विषय पर अब सामाजिक और सियासी बहस छिड़ चुकी है।

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