उत्तरकाशी: उत्तराखंड के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल ट्रेक से रहस्यमय ढंग से लापता हुई 24 वर्षीय एमबीए (MBA) छात्रा बबीता पांडे का 13 दिन बीत जाने के बाद भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है। घने जंगलों और पहाड़ों में चले सघन सर्च ऑपरेशन में कोई बड़ी सफलता न मिलने के बाद अब उत्तरकाशी पुलिस का पूरा फोकस तकनीकी जांच और सर्विलांस पर टिक गया है। पुलिस लापता छात्रा के मोबाइल सर्विलांस के साथ-साथ कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और संभावित रास्तों के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगालने में जुटी है।

जानकारी के अनुसार, रामनगर की रहने वाली बबीता पांडे बीते 29 मई को अपने दो साथियों के साथ दयारा बुग्याल ट्रेक पर आई थी, जहां ट्रेक के अहम पड़ाव ‘गोई’ से वह अचानक लापता हो गई। बबीता की खोजबीन के लिए पुलिस, वन विभाग, एसडीआरएफ (SDRF), एनडीआरएफ (NDRF), आईटीबीपी (ITBP), सेना, एसओजी (SOG) और आपदा प्रबंधन की क्यूआरटी सहित कई आला टीमों ने करीब दस दिनों तक युद्धस्तर पर जंगलों की खाक छानी, लेकिन कोई कामयाबी हाथ नहीं लगी। नतीजतन, जमीनी सर्च ऑपरेशन अब थोड़ा धीमा पड़ गया है, हालांकि कुछ जवान अभी भी उम्मीद के साथ मोर्चे पर डटे हैं।

इधर, अपनी लाडली की कोई खबर न मिलने से परेशान बबीता की मां और भाई एक बार फिर उम्मीद और भारी निराशा के बीच रामनगर से उत्तरकाशी पहुंचे हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बबीता की आखिरी मोबाइल लोकेशन गोई पड़ाव से करीब 200 मीटर नीचे दर्ज की गई थी, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि वह दयारा से नीचे की ओर आई होगी। इसी संभावना को देखते हुए पुलिस अब सर्विलांस और रास्तों पर नजर रख रही है, साथ ही मामले की हर एंगल से तफ्तीश के लिए बबीता की कुछ करीबी सहेलियों से भी पूछताछ की जा रही है।

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