उत्तर प्रदेश की राजधानी का साउथ लखनऊ क्षेत्र अपराध का एक नया और खौफनाक गढ़ बनकर उभरा है। इस इलाके में हत्या, गैंगवार, एक्सटॉर्शन (वसूली), भूमाफिया और संगठित अपराध का बोलबाला लगातार बढ़ता जा रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरे घटनाक्रम में दो मुख्य थाने—मोहनलाल गंज और पीजीआई—सबसे ज्यादा कुख्यात साबित हो रहे हैं। ताजा मामला पीजीआई इलाके के सरथुआ गांव का है, जहां शुक्रवार को दो गुटों के बीच हुए भीषण गैंगवार से पूरे इलाके में दहशत फैल गई। दोनों पक्षों में विवाद इस कदर बढ़ा कि जमकर पथराव, मारपीट और कई राउंड फायरिंग हुई, जिसके बीच एक युवक की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई।

इस खूनी संघर्ष में जान गंवाने वाले मृतक की पहचान जगतखेड़ा गांव के रहने वाले अभिषेक रावत के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक, अभिषेक को फोन करके किसी बहाने से मिलने के लिए बुलाया गया था। आरोप है कि जैसे ही वह सरथुआ गांव पहुंचा, घात लगाकर बैठे हमलावरों ने उस पर लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। वारदात के दौरान हुई अंधाधुंध फायरिंग और पथराव की वजह से चारों तरफ अफरातफरी मच गई और डर के मारे स्थानीय लोग अपने-अपने घरों में कैद हो गए। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस को घटनास्थल से कई क्षतिग्रस्त मोटरसाइकिलें मिली हैं। इस झड़प में दूसरे पक्ष का भी एक युवक घायल हुआ है, जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

स्थानीय स्तर पर यह भी गंभीर आरोप लग रहे हैं कि पुलिस के कथित संरक्षण के कारण ही दक्षिणी इलाके में संगठित अपराधियों का मनोबल आसमान छू रहा है। इससे पहले भी इस क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाले कई बड़े कारनामे सामने आ चुके हैं, जिनमें चर्चित संदीप सिंह मर्डर केस, एक व्यापारी से रंगदारी (एक्सटॉर्शन) वसूलने की कोशिश और फिर एक शातिर अपराधी की तहरीर पर पीड़ित व्यापारी के खिलाफ ही क्रॉस केस दर्ज करने जैसे मामले शामिल हैं। इसी लचर कानून व्यवस्था और कथित शह के चलते अपराधी बेखौफ होकर सरेआम वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

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