अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका में वोटर पहचान के कड़े नियमों और ‘SAVE America Act’ को लागू करने की मांग के दौरान भारतीय चुनावी प्रणाली का जिक्र करने के बाद, भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) की तरफ से एक अहम प्रतिक्रिया सामने आई है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि भारत के चुनावी सिस्टम की “भरोसेमंद और मजबूती” दुनिया भर में अच्छी तरह से स्थापित है और इसे वैश्विक स्तर पर व्यापक मान्यता और सम्मान प्राप्त है।

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट साझा करते हुए अमेरिका में सख्त चुनावी सुधारों की वकालत की थी। ट्रंप ने भारत के पिछले आम चुनावों का हवाला देते हुए वहां की मतदान व्यवस्था, मतदाताओं की भारी संख्या और वैध फोटो पहचान पत्र की अनिवार्यता की सराहना की थी। उन्होंने इस महीने की शुरुआत में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बयानों का भी जिक्र किया, जिसमें चुनाव प्रणाली की पारदर्शिता पर बात की गई थी। ट्रंप अपनी इस मांग के समर्थन में भारत और ब्राजील जैसे देशों का उदाहरण दे रहे थे, जो बायोमेट्रिक डेटाबेस और सख्त पहचान नियमों का पालन करते हैं।

नई दिल्ली में आयोजित एक नियमित मीडिया ब्रीफिंग के दौरान, जब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से अमेरिकी राष्ट्रपति के इन बयानों पर प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने सीधे तौर पर कोई राजनीतिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत के लोकतांत्रिक और चुनावी प्रोसेस की विश्वसनीयता और मजबूती किसी परिचय की मोहताज नहीं है और यह एक वैश्विक स्तर पर स्थापित तथ्य है। भारत में चुनावों का संचालन जिस पैमाने और पारदर्शिता के साथ किया जाता है, उसकी मिसाल पूरी दुनिया में दी जाती है।

दूसरी तरफ, अमेरिका में ‘SAVE America Act’ को लेकर बहस छिड़ी हुई है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल अमेरिकी नागरिक ही संघीय चुनावों में मतदान कर सकें। इस कानून के तहत वोटर रजिस्ट्रेशन के समय नागरिकता के ठोस सबूत और वैध पहचान पत्र पेश करने का प्रावधान प्रस्तावित है। अमेरिका में चुनावी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दूसरे देशों की प्रणालियों का अध्ययन किया जा रहा है, जिसमें भारत का मजबूत और व्यवस्थित चुनावी ढांचा चर्चा के केंद्र में रहा है। भारत के चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं जिसके द्वारा संचालित होने वाली ये प्रक्रियाएं हमेशा से वैश्विक लोकतंत्र के लिए एक उदाहरण रही हैं। इस पूरी घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर भारतीय चुनावी प्रबंधन की मजबूती की चर्चा जोर पकड़ रही है।

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