नई दिल्ली। आमतौर पर माना जाता है कि दिनभर की भागदौड़ और थकान के बाद रात में गहरी नींद आनी ही चाहिए, लेकिन कई लोगों के साथ यह धारणा बिल्कुल फिट नहीं बैठती। वे रातभर बिस्तर पर करवटें बदलते रहते हैं, लेकिन नींद उनसे कोसों दूर रहती है। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो इसके पीछे कुछ गंभीर मेडिकल और लाइफस्टाइल से जुड़े कारण हो सकते हैं। आइए विस्तार से समझते हैं।

थकान के बावजूद नींद न आने के प्रमुख कारण

इंसोम्निया: जब शरीर पूरी तरह थकने के बाद भी रात में सो नहीं पाता तो इसे अक्सर इंसोम्निया कहा जाता है। यह एक प्रकार का स्लीप डिसऑर्डर है, जिसमें व्यक्ति को सोने में कठिनाई होती है और गंभीर मामलों में तो रातभर नींद ही नहीं आती।

तनाव और एंग्जाइटी: सोते समय दिमाग में लगातार विचारों का आना, किसी बात को लेकर लंबे समय से चल रही चिंता और एंग्जाइटी जैसी मानसिक परेशानियां स्लीप साइकल को पूरी तरह बिगाड़ देती हैं।

थायरॉइड: अगर शरीर का थायरॉइड लेवल संतुलित नहीं है तो यह भी नींद न आने का एक बड़ा कारण बन सकता है। हालांकि, सिर्फ नींद न आने की समस्या को देखकर इसे थायरॉइड डिसऑर्डर से जोड़ना सही नहीं होगा।

मेनोपॉज: महिलाओं में नींद न आने की एक अहम वजह मेनोपॉज भी है, क्योंकि इस दौरान शरीर में कई तरह के हॉर्मोनल बदलाव आते हैं। अगर इसके साथ हॉट फ्लैश और अत्यधिक पसीना आने की समस्या भी हो तो इस संकेत को कभी नजरअंदाज न करें।

दवाइयां: ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन और एंग्जाइटी जैसी बीमारियों से बचने के लिए ली जा रही कुछ दवाइयां भी स्लीप साइकल को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

बेहतर नींद के लिए कारगर टिप्स

  1. सोने के लिए कमरे में पर्याप्त अंधेरा और हल्की ठंडक होनी चाहिए। शांत माहौल नींद के लिए बेहद जरूरी है।
  2. रोजाना सोने का एक निश्चित समय तय करें, ताकि शरीर की बॉडी क्लॉक उसी के अनुसार खुद को ढाल सके।
  3. कैफीन, शराब और निकोटीन के सेवन तथा सोने के समय के बीच कम से कम 4 से 6 घंटे का अंतर जरूर रखें।
  4. ज्यादा स्क्रीन टाइम भी स्लीप साइकल को खराब करता है, इसलिए सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल और लैपटॉप को अलग रख दें।

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