केंद्रीय सरकार ने हाल ही में जम्मू और कश्मीर के लिए 1,086 करोड़ रुपये की रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर की आवंटन की घोषणा की, जो कि यूनियन रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा की गई। यह आवंटन केंद्र सरकार की उस योजना को रेखांकित करता है, जिसमें जम्मू और कश्मीर की कनेक्टिविटी को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है, खासकर अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के बाद।

जहां एक ओर इंफ्रास्ट्रक्चर को विकास और स्थिरता का प्रमुख तत्व माना जा रहा है, वहीं जम्मू और कश्मीर में रेलवे को एक महत्वपूर्ण विकास स्तंभ के रूप में देखा जा रहा है। दशकों तक कश्मीर में विकास एक वादा बनकर रह गया था। राजनीतिक अस्थिरता, कठिन भौगोलिक स्थिति और सुरक्षा समस्याएं इस क्षेत्र के विकास को पीछे रखे हुए थीं, खासकर परिवहन क्षेत्र में।

मौसम के कारण सड़कों का बंद होना, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और अन्य कठिनाइयाँ कश्मीर की जीवनशैली का हिस्सा बन चुकी थीं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में इस स्थिति में बदलाव आना शुरू हुआ है। पहाड़ों में से गुजरती स्टील की पटरियाँ और दुनिया की सबसे कठिन भौगोलिक संरचनाओं में सुरंगें इस परिवर्तन के प्रतीक बन गए हैं। रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर अब इस बदलाव का मुख्य आधार बन चुका है।

यहां केंद्रीय सरकार की निवेशों का महत्त्व है, जो केवल आर्थिक प्रतिबद्धता ही नहीं, बल्कि रणनीतिक उद्देश्य का भी प्रतीक हैं। कश्मीर में कनेक्टिविटी अब महज एक विकासात्मक विकल्प नहीं बल्कि यह आर्थिक एकीकरण और दीर्घकालिक राष्ट्र निर्माण का एक आवश्यक हिस्सा बन चुका है।

इस बदलाव में सबसे महत्वपूर्ण परियोजना उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक (USBRL) है। यह 272 किलोमीटर लंबी परियोजना दशकों से चली आ रही थी और अब इसे एक इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। इसमें 900 से ज्यादा पुल और दर्जनों सुरंगें शामिल हैं, जिनमें चेनाब रेल ब्रिज, जो दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज है, शामिल है।

इस परियोजना का प्रभाव सिर्फ तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह कश्मीर की कनेक्टिविटी को सभी मौसमों में सुगम बनाता है। इससे कश्मीर की सड़क लिंक पर निर्भरता कम हो रही है, खासकर श्रीनगर-जम्मू हाईवे जैसी असुरक्षित सड़कों पर।

कश्मीर के दूरदराज के इलाकों में बडगाम से संगलदान तक रेलवे सेवाओं ने आर्थिक गतिविधियों को नजदीक लाया है। किसान, व्यापारी, छात्र और मजदूर अब तेज, विश्वसनीय और सस्ते परिवहन का लाभ उठा पा रहे हैं। सर्दी के मौसम में जब सड़कें बंद हो जाती थीं, तब वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी सेवा यह सुनिश्चित करती है कि कनेक्टिविटी बनी रहे।

वहीं कश्मीर के लिए एक और महत्वपूर्ण योजना है, बारामुला-उरी रेल लाइन और जम्मू-राजोरी रेल कॉरिडोर, जो वर्तमान में सर्वे और DPR (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) के चरण में हैं। इन परियोजनाओं से सीमांत और पहाड़ी जिलों को जोड़ने का उद्देश्य है, जो कई दशकों से भौगोलिक रूप से एक दूसरे से कटे हुए थे। इसके अलावा रेलवे के विस्तार से न केवल यात्रा की सुविधा बढ़ी है, बल्कि यह पर्यटन में पुनरुत्थान, सामानों की तेज़ आवाजाही, निर्माण कार्यों के दौरान रोजगार सृजन और दीर्घकालिक लॉजिस्टिक दक्षता में भी योगदान दे रहा है।

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