गुड़गांव: हरियाणा के खिलाड़ियों ने एशियन गेम्स में देश का नाम रोशन किया है, लेकिन गुड़गांव के ताऊ देवी लाल स्टेडियम में ट्रेनिंग करने वाले एथलीट्स को इन दिनों एक अलग तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के आधिकारिक हेलीकॉप्टर की स्टेडियम परिसर में पार्किंग के चलते खिलाड़ियों को करीब चार दिनों तक एथलेटिक्स ट्रैक और सिंथेटिक ग्राउंड की ट्रेनिंग सुविधा नहीं मिल सकी।
बता दे कि बुधवार को हेलीकॉप्टर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को चंडीगढ़ लेकर रवाना हुआ, जिसके बाद खिलाड़ियों के लिए ट्रैक दोबारा खोल दिया गया। स्टेडियम में बड़ी संख्या में स्टेट-लेवल एथलीट रोजाना अभ्यास करते हैं। ऐसे में लगातार कई दिनों तक मुख्य ट्रेनिंग सुविधा बंद रहने से उनकी तैयारी प्रभावित होने की बात सामने आई है।
खिलाड़ियों का सवाल- ट्रेनिंग से समझौता क्यों?
स्टेडियम में अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों के मुताबिक, प्रतियोगिताओं की तैयारी कर रहे एथलीट्स के लिए एक दिन की ट्रेनिंग छूटना भी महत्वपूर्ण होता है। एक खिलाड़ी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा कि नियमित अभ्यास में कुछ दिनों का ब्रेक प्रदर्शन और तैयारी दोनों को प्रभावित कर सकता है।
एक खिलाड़ी ने सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को उठाया। पोस्ट में कहा गया कि स्टेडियम में सैकड़ों स्टेट-लेवल खिलाड़ी रोज अभ्यास करते हैं और कई खिलाड़ियों के पास ट्रेनिंग के लिए यही प्रमुख ट्रैक है। सवाल उठाया गया कि VIP व्यवस्था के लिए खिलाड़ियों की ट्रेनिंग और उनके लक्ष्य से समझौता क्यों किया जाए।
अभिभावक और कोच भी नाराज
एक अभिभावक ने बताया कि बच्चे शहर के अलग-अलग हिस्सों से ट्रेनिंग के लिए स्टेडियम पहुंचते हैं। वहां पहुंचने के बाद ट्रैक बंद होने की जानकारी मिलना उनके लिए काफी निराशाजनक था। एक कोच ने कहा कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन हेलीकॉप्टर के लिए स्टेडियम की ट्रेनिंग सुविधाओं को बार-बार बंद करना उचित नहीं है। उनके मुताबिक हेलीकॉप्टर पार्किंग के लिए कोई वैकल्पिक स्थान तय किया जाना चाहिए, ताकि खिलाड़ियों की ट्रेनिंग प्रभावित न हो।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
ताऊ देवी लाल स्टेडियम में हेलीकॉप्टर की वजह से खेल गतिविधियों पर असर पड़ने का यह पहला मामला नहीं है। मार्च 2020 में भी तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के हेलीकॉप्टर की लैंडिंग के लिए स्टेडियम के क्रिकेट एरिना को ट्रेनिंग के दौरान खाली कराया गया था। उस समय स्टेडियम प्रबंधन की ओर से प्रशासन को अलग हेलीपैड की व्यवस्था करने के लिए पत्र लिखे जाने की बात सामने आई थी।
सुरक्षा कारणों से ट्रैक पर लगी पाबंदी
हेलीकॉप्टर के स्टेडियम परिसर में पहुंचने के बाद बास्केटबॉल और वॉलीबॉल कोर्ट जैसी कुछ सुविधाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन सुरक्षा प्रोटोकॉल के कारण सिंथेटिक ग्राउंड और रनिंग ट्रैक को बंद कर दिया जाता है। ऐसे में एथलीट इन सुविधाओं तक नहीं पहुंच पाते। खिलाड़ियों का कहना है कि इससे उनकी नियमित ट्रेनिंग प्रभावित होती है, खासकर तब जब उन्हें लगातार प्रतियोगिताओं के लिए तैयारी करनी हो।
दिल्ली में पार्किंग पर लगता है चार्ज
अधिकारियों के मुताबिक, ताऊ देवी लाल स्टेडियम GMDA के तहत आने वाली सरकारी खेल सुविधा है और मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर को यहां पार्क करने की एक वजह दिल्ली में पार्किंग पर लगने वाला शुल्क भी है। स्टेडियम मिनी सचिवालय और PWD गेस्टहाउस के करीब है, इसलिए इसे हेलीकॉप्टर के लिए सुविधाजनक स्थान माना जाता है। गुड़गांव में फिलहाल राज्य सरकार या सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के तहत कोई अलग सरकारी हेलीपैड नहीं है। हालांकि निजी लैंडिंग सुविधाएं उपलब्ध हैं।
ग्लोबल सिटी में प्रस्तावित है हेली हब
हरियाणा सरकार ने वर्ष 2022 में ग्लोबल सिटी में करीब 25 एकड़ जमीन इंटीग्रेटेड हेली हब के लिए केंद्र को दी थी। प्रस्तावित परियोजना में हेलीपोर्ट, हैंगर, रिपेयर और दूसरी एविएशन सुविधाएं शामिल हैं। हालांकि अभी इसका निर्माण शुरू नहीं हुआ है। HSIIDC की ओर से परियोजना के लिए जमीन ट्रांसफर की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। फिलहाल सरकारी हेलीकॉप्टर के लिए ताऊ देवी लाल स्टेडियम एक सुविधाजनक विकल्प बना हुआ है।
CM के मीडिया सलाहकार ने बताई अलग वजह
मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार राजीव जेटली के मुताबिक हेलीकॉप्टर को स्टेडियम में चार दिनों तक इसलिए खड़ा रखना पड़ा क्योंकि उसमें तकनीकी खराबी आ गई थी। उन्होंने कहा कि हेलीकॉप्टर को स्टैंडबाय के तौर पर कई दिनों तक पार्क नहीं किया गया था।
उनके मुताबिक आम तौर पर हेलीकॉप्टर स्टेडियम में पार्क होने के बाद करीब आधे घंटे में उड़ान भर लेता है, लेकिन इस बार तकनीकी समस्या के कारण ऐसा नहीं हो सका। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी 4 से 6 अक्टूबर तक सिंगापुर दौरे पर थे। इस दौरान हेल्थकेयर, वॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर, एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट से जुड़े करीब 5,500 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव सामने आने की जानकारी राज्य सरकार ने दी है।



