गर्मियों में लीची सबसे पसंदीदा फलों में से एक है। इसका मीठा और रसीला स्वाद लोगों को खूब पसंद आता है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार लीची का सेवन सही तरीके से करना जरूरी है। खासकर खाली पेट लीची खाना कुछ लोगों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
खाली पेट लीची खाने से बढ़ सकता है खतरा
रिपोर्ट के अनुसार, खाली पेट लीची खाने से एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) का खतरा बढ़ सकता है। यह समस्या विशेष रूप से छोटे बच्चों में अधिक देखी जाती है। जिन बच्चों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है या जो बिना धोए फल खा लेते हैं, उनमें इसका जोखिम अधिक माना जाता है।
गर्मी में क्यों बढ़ जाती है परेशानी?
तापमान बढ़ने के दौरान लीची में बैक्टीरिया, फंगस और वायरस पनपने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में संक्रमित या बिना साफ किए लीची खाने से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के लक्षणों में बुखार, दौरे पड़ना और गंभीर स्थिति में कोमा तक शामिल हो सकता है।
लीची में पाए जाते हैं प्राकृतिक टॉक्सिन
लीची में हाइपोग्लाइसिन-ए (Hypoglycin-A) और मेथिलीन साइक्लोप्रोपाइल ग्लाइसिन (MCPG) नामक दो प्राकृतिक टॉक्सिक कंपाउंड पाए जाते हैं। ये शरीर में ग्लूकोज के सामान्य उपयोग में बाधा डाल सकते हैं और ब्लड शुगर का स्तर अत्यधिक कम कर सकते हैं। इस स्थिति को हाइपोग्लाइसीमिया कहा जाता है।
खाली पेट लीची खाने पर दिख सकते हैं ये लक्षण
- अत्यधिक पसीना आना
- उल्टी होना
- शरीर में कमजोरी महसूस होना
- भ्रम की स्थिति
- गंभीर मामलों में दौरे पड़ना
किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?
15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को लीची खाते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इसके अलावा कुपोषित बच्चों और ऐसे लोगों को भी खाली पेट लीची खाने से बचना चाहिए, जो लंबे समय तक बिना भोजन के रहते हैं।
लीची खाने का सही तरीका
विशेषज्ञों के अनुसार लीची हमेशा भोजन करने के बाद खानी चाहिए। एक बार में अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से बचना चाहिए। साथ ही लीची खाने से पहले उसे साफ पानी से अच्छी तरह धोना जरूरी है, ताकि किसी प्रकार के बैक्टीरिया या वायरस का खतरा कम हो सके।



