विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उपजे विवाद और साख पर उठते सवालों के बीच, भारतीय चुनाव आयोग ने अपनी छवि सुधारने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक नई डिजिटल पहल शुरू की है। आयोग अब जनता का विश्वास फिर से जीतने के लिए ‘बचाव’ करने के बजाय ‘सुधार’ पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

आयोग की इस नई रणनीति के केंद्र में ‘ECINET’ नामक एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए एक ‘वन-स्टॉप’ समाधान माना जा रहा है। इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य चुनावी प्रक्रियाओं को सरल, सुलभ और जवाबदेह बनाना है। नागरिक अब एक ही इंटरफेस के जरिए मतदाता पंजीकरण, प्रविष्टियों में सुधार, विलोपन के लिए आवेदन और आवेदन को ट्रैक करने जैसी सभी सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। इतना ही नहीं, नागरिक यहां से अपना डिजिटल मतदाता पहचान पत्र (e-EPIC) भी डाउनलोड कर सकते हैं और सीधे शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं।

इस प्लेटफॉर्म की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके पायलट चरण में ही 101 मिलियन से अधिक पंजीकरण फॉर्म पर काम शुरू हो चुका है, और प्रतिदिन लगभग 2.7 लाख फॉर्म प्रोसेस किए जा रहे हैं। इसमें बूथ स्तर के अधिकारियों (BLO) से लेकर चुनाव अधिकारियों तक से सीधे जुड़ने की सुविधा दी गई है, जो प्रशासनिक दक्षता को कई गुना बढ़ा देगी।

डिजिटल पहल के साथ-साथ, चुनाव आयोग युवाओं को जोड़ने के लिए शैक्षणिक संस्थानों में मतदाता जागरूकता कार्यक्रमों को भी फिर से सक्रिय कर रहा है। ‘क्लब’ के माध्यम से क्विज, नकली चुनाव और नागरिक शिक्षा गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि छात्र पहली बार मतदाता बनने से पहले ही चुनावी प्रक्रिया से पूरी तरह परिचित हो सकें।

अधिकारियों का कहना है कि 22 भाषाओं में उपलब्ध होने वाली यह सुविधा पारदर्शी, तेज और नागरिक-केंद्रित है। चुनाव आयोग की यह पहल निश्चित रूप से उन लाखों मतदाताओं के लिए राहत लेकर आई है जो पहले छोटी-छोटी सुधार प्रक्रियाओं के लिए दफ्तरों के चक्कर काटते थे। अब उम्मीद है कि डिजिटल पारदर्शिता से चुनावी लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा।

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