नई दिल्ली : ओमान की खाड़ी में एक वाणिज्यिक तेल टैंकर पर हुए अमेरिकी सैन्य हमले में तीन भारतीय नागरिकों की मौत का मामला अब देश के भीतर एक बड़े राजनीतिक और कूटनीतिक विवाद में तब्दील होता जा रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो को फोन पर कड़ी चेतावनी दिए जाने के बाद, अब भारतीय राजनीति के दिग्गज और पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने इस मुद्दे पर बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। सुब्रमण्यम स्वामी ने मोदी सरकार से अमेरिका के खिलाफ सख्त राजनयिक कदम (Diplomatic Action) उठाने की मांग की है।

सुब्रमण्यम स्वामी ने केंद्र सरकार से सीधे तौर पर मांग करते हुए कहा है कि भारत में तैनात अमेरिकी राजदूत को तत्काल प्रभाव से वापस उनके देश भेज दिया जाना चाहिए। स्वामी ने अमेरिकी प्रशासन के अड़ियल रवैये पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में अमेरिकी सेना के हमले के कारण हमारे तीन निर्दोष नागरिकों की जान चली गई, लेकिन इसके बावजूद अमेरिकी प्रशासन या उनके राजदूत ने इस दुखद घटना और हत्याओं पर कोई आधिकारिक खेद या दुख तक प्रकट नहीं किया है।”

राजनयिक मर्यादा और नागरिकों की सुरक्षा पर उठाए सवाल
स्वामी ने सख्त लहजे में कहा कि जब तक अमेरिका इस गंभीर चूक की जिम्मेदारी नहीं लेता, तब तक अमेरिकी राजदूत को नई दिल्ली में रहने का कोई अधिकार नहीं है और उन्हें तुरंत वॉशिंगटन लौट जाना चाहिए। उन्होंने भारत सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि अपने नागरिकों की सुरक्षा और संप्रभुता के सम्मान के लिए भारत को कड़ा रुख अपनाना होगा।

गौरतलब है कि हाल ही में ओमान की खाड़ी के पास एक जहाज़ी रूट पर अमेरिकी सेना द्वारा किए गए ऑपरेशन में तीन भारतीय क्रू मेंबर्स की मौत हो गई थी, जबकि 21 अन्य भारतीयों को सुरक्षित बचा लिया गया था। इस घटना के बाद से अमेरिका और ईरान एक-दूसरे पर दोषारोपण कर रहे हैं, लेकिन भारत के भीतर अब इस बात को लेकर गुस्सा बढ़ रहा है कि वैश्विक शक्तियों की इस जंग में भारतीय नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। सुब्रमण्यम स्वामी के इस ताजा बयान ने सोशल मीडिया से लेकर देश के नीतिगत गलियारों तक एक नई बहस छेड़ दी है।

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