अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने अपने प्रेसिडेंट जज टोमोको अकाने और सीनियर ट्रायल लॉयर अब्दुलाये सेये के खिलाफ वाशिंगटन द्वारा लगाए गए नए प्रतिबंधों की कड़ी निंदा की है। हेग स्थित इस अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल ने इन अमेरिकी कार्रवाइयों को वैश्विक न्याय व्यवस्था के लिए सीधा खतरा और न्यायिक स्वतंत्रता पर एक बड़ा हमला करार दिया है। कोर्ट का कहना है कि इस तरह के दंडात्मक कदमों से युद्ध अपराधों के पीड़ितों को न्याय मिलने की प्रक्रिया गंभीर रूप से प्रभावित होती है।
आईसीजे और अन्य वैश्विक मंचों पर चिंता जताते हुए ICC ने कहा कि अधिकारियों को इस तरह धमकाने से अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था कमजोर होती है। हालिया प्रतिबंधों के बाद स्थिति यह हो गई है कि ट्रिब्यूनल के 18 जजों में से 9, दोनों डिप्टी-प्रॉसिक्यूटर, पूर्व प्रॉसिक्यूटर और एक स्टाफ मेंबर पर अमेरिका ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जब न्याय से जुड़े लोगों को कानून लागू करने के लिए डराया जाता है, तो यह वैश्विक स्तर पर दंड से मुक्ति के खिलाफ चल रही लड़ाई में एक बड़ी रुकावट पैदा करता है।
वाशिंगटन के लगातार बढ़ते दबाव और प्रतिबंधों के बावजूद, ICC ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह किसी भी दबाव में आने वाला नहीं है। कोर्ट ने अपने बयान में दोहराया कि वह बिना डरे अपने कर्मचारियों और अत्याचारों के पीड़ितों के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है। साथ ही, रोम संविधि के प्रावधानों का पूरी तरह पालन करते हुए, बिना किसी भेदभाव के अपने कर्तव्यों का निर्वहन जारी रखा जाएगा। इस कठिन समय में कई देशों की सरकारों और सिविल सोसायटी द्वारा दिखाए गए समर्थन के लिए भी कोर्ट ने आभार जताया है।
दूसरी ओर, अमेरिकी प्रशासन की ओर से इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। यूएस सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा कि यह कार्रवाई ICC के कथित “राजनीतिकरण” और “जवाबदेही से बचने” की प्रवृत्ति के खिलाफ उनके अभियान का हिस्सा है। ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि ICC ने उन देशों के नागरिकों पर अधिकार क्षेत्र जताने का प्रयास किया है, जिन्होंने रोम स्टैच्युट को मंजूरी नहीं दी है। अमेरिका ने एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 14203 के तहत इन प्रतिबंधों को सही ठहराते हुए कहा है कि वह अपनी संप्रभुता पर किसी भी बाहरी न्यायिक हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेगा और कोर्ट के खिलाफ अपना कूटनीतिक अभियान जारी रखेगा।













