संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान गुरुवार को उस वक्त सियासी पारा चढ़ गया जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के बीच जुबानी जंग छिड़ गई। अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए ‘सास-बहू’ सीरियल का जिक्र किया, जिस पर स्मृति ईरानी ने ट्वीट कर कड़ा जवाब दिया है।
अखिलेश यादव का तंज: महिलाओं के बीच ही कॉम्पिटिशन करा देंगे
लोकसभा में चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने बिल की विसंगतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे 33 प्रतिशत सीटें कौन सी होंगी। उन्होंने कहा, अध्यक्ष महोदय, अगर आप सीटें रिजर्व कर देंगे तो ये महिलाओं के बीच ही कॉम्पिटिशन करा देंगे। बाएं तरफ वाले सदस्य कह रहे हैं कि वो तो होना चाहिए।
अखिलेश यादव ने आगे चुटकी लेते हुए कहा, वो ‘सास-बहू’ वाली तो हार गईं। अगर पार्टियों को मौका मिलेगा तो न केवल कॉम्पिटिशन से बच सकते हैं बल्कि चुनाव लड़ने वाली महिलाओं की संख्या भी ज्यादा होगी। सपा प्रमुख ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह महिला आरक्षण के बहाने ‘नारी को नारा’ बनाने की कोशिश कर रही है, जबकि उनके अपने मूल संगठन में महिलाओं के मान-सम्मान की क्या स्थिति है, यह सबको पता है।
स्मृति ईरानी का पलटवार: राजनीति धरोहर में मिली, नौकरी कभी की नहीं
अखिलेश यादव के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए स्मृति ईरानी ने सोशल मीडिया पर उन पर निशाना साधा। उन्होंने ट्वीट कर लिखा,
सुना है आज अखिलेश जी ने संसद में मुझे याद किया। अच्छा है, जिनको राजनीति धरोहर में मिली, वे उनको भी याद करते हैं जो अपने दम पर आसमान में सुराख करते हैं। स्मृति ने आगे लिखा, कामकाजी औरत पर वे टिप्पणी करते हैं जिन्होंने जिंदगी में कभी कोई नौकरी नहीं की। सीरियल से ध्यान हटाकर संसद पर लगाएं और महिलाओं के संबल हेतु अहम बिल पास कराएं।
भाजपाई चालबाजी के खिलाफ है सपा: अखिलेश
अखिलेश यादव ने सदन में स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी महिलाओं के लिए आरक्षण के समर्थन में है, लेकिन भाजपाई चालबाजी के खिलाफ है। उन्होंने सवाल उठाया कि बिना स्पष्टता के इस बिल को लाना केवल एक चुनावी एजेंडा है। सपा प्रमुख ने मांग की कि आरक्षण को आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर लागू किया जाना चाहिए ताकि पिछड़े और वंचित वर्गों की महिलाओं को उनका वास्तविक हक मिल सके।



